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ऑडिटर्स और सरकारी बैंक मिलकर शुरू करेंगे बैलेंस कनफर्मेशन पोर्टल, जानिए क्या होगा फायदा

ऑडिटर्स का कहना है कि उन्हें बैंकों से कनफर्मेशन हासिल करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कुछ मामलों में इस तरह की जानकारी मिलने में देर होती है या पूरी जानकारियां नहीं मिलती हैं। ऑडिटर्स के लिए कई तरह की जानकारियों की रिपोर्टिंग जरूरी है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 06, 2023 पर 5:13 PM
ऑडिटर्स और सरकारी बैंक मिलकर शुरू करेंगे बैलेंस कनफर्मेशन पोर्टल, जानिए क्या होगा फायदा
कुछ बैंक कनफर्मेशन देने के लिए थर्ड पार्टी वेंडर्स की सहायता लेते हैं। इसके लिए वे ऑडिटर्स से फीस लेते हैं।

चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और 12 सरकारी बैंकों (PSU Banks) ने तीन महीने में एक पोर्टल शुरू करने का प्लान बनाया है। यह पोर्टल कंपनियों के अकाउंट बैलेंसेज की पुष्टि करेगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही ऑडिटिंग कॉस्ट में कमी आएगी। इस मामले से जुड़े लोगों ने यह जानकारी दी। बाद में इस प्लेटफॉर्म पर प्राइवेट बैंक और म्यूचुअल फंडों के भी शामिल होने की संभावना है। इस प्लेटफॉर्म का मालिकाना हक इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के पास होगा।

बैलेंस कनफर्मेशन के लिए स्टैंडर्ड प्रोसेस नहीं

ICAI ने मनीकंट्रोल को बताया, "इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने बैंकों से अकाउंट बैलेंस कनफर्मेशन हासिल करने में ऑडिटर्स को होने वाली दिक्कतों के बारे में चर्चा की है। हम आईबीए के साथ मिलकर बैलेंस कनफर्मेशन पोर्टल डेवलप करने के प्लान पर काम कर रहे हैं।" अभी बैंकों से बैलेंस कनफर्मेशन हासिल करने के लिए कोई स्टैंडर्ड प्रोसेस नहीं है। आईसीएआई के एक मेंबर ने कहा कि अगर ऑडिटर्स ऑडिट के प्रमाण के रूप में अधूरा कनफर्मेशन का इस्तेमाल करते हैं तो उन्हें रिस्क रहता है।

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