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CBSE New Rule : साल में दो बार होगी 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा, एग्जाम डेट भी आ गए सामने

CBSE बोर्ड से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए खुशखबरी है। बोर्ड ने फैसला लिया है कि अब हाई स्कूल के लिए बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित की जाएंगी। इस संबंध में सीबीएसई के ड्राफ्ट को मंजूरी मिल गई है

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 25, 2025 पर 9:50 PM
CBSE New Rule : साल में दो बार होगी 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा, एग्जाम डेट भी आ गए सामने
CBSE बोर्ड से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए खुशखबरी है।

CBSE New Rule Board Exams : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) अपनी परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। सीबीएसई ने फैसला लिया है कि 2026 से कक्षा 10वीं के लिए बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाएगी। अगर कोई छात्र बीमार हो जाता है या फिर किसी कारणवश उसका एग्जाम छूट जाता हो तो वे दोबारा परीक्षा दे सकता है। बता दें कि CBSE ने 2026 से साल में 2 बार 10वीं के बोर्ड एग्जाम कराने वाले ड्राफ्ट रेगुलेशन को मंजूरी दी है। वहीं इस ड्राफ्ट पर सभी स्टेकहोल्डर्स 9 मार्च तक अपना फीडबैक दे सकते हैं।

दो बार होगी 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 2026 से 10वीं के बोर्ड एग्जाम साल में दो बार कराने के ड्रॉफ्ट पर सभी स्टेकहोल्डर्स के राय के बाद इसे पॉलिसी की रुप दिया जाएगा। ड्राफ्ट के अनुसार, पहली परीक्षा 17 फरवरी से 6 मार्च तक होगी। जबकि दूसरी परीक्षा 5 मई से 20 मई तक आयोजित की जाएगी। बता दें कि भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने 19 फरवरी को CBSE बोर्ड के अधिकारियों और अन्य लोगों के साथ इस प्रस्ताव पर चर्चा की थी। इसके बाद, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने CBSE, NCERT, KVS, NVS और स्कूल अधिकारियों के साथ मिलकर इस योजना पर विचार किया और यह निर्णय लिया गया।

बता दें कि सीबीएसई ने फैसला लिया है कि 2026 से कक्षा 10वीं के लिए बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाएगी। अगर कोई छात्र बीमार हो जाता है या फिर किसी कारणवश उसका एग्जाम छूट जाता हो तो वे दोबारा परीक्षा दे सकता है। सीबीएसई द्वारा साल में दो बार परीक्षा कराने के निर्णय के बाद, अब छात्रों को ज्वाइंट इंट्रेंस एग्जाम (JEE) की तरह ऑप्शन मिलेगा कि वे परीक्षा एक बार दें या दो बार। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अनुसार, छात्रों को यह अधिकार दिया जाएगा कि वे खुद तय करें कि उन्हें परीक्षा कैसे देनी है। यदि कोई छात्र दो बार परीक्षा देता है, तो उसका सबसे अच्छा स्कोर ही माना जाएगा और उसी को अंतिम रूप से कंसीडर किया जाएगा। इस फैसले से छात्रों को ज्यादा मौके मिलेंगे और उन्हें बेहतर परिणाम प्राप्त करने का मौका मिलेगा।

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