NEET-UG 2024 Paper Leak: पेपर लीक मामले में अब 23 जुलाई को होगी सुनवाई, CJI ने कहा- 'पेपर लीक 4 मई से पहले हुआ था'
NEET-UG 2024 Paper Leak: विपक्षी सांसदों द्वारा लोकसभा में NEET परीक्षा का मुद्दा उठाए जाने पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जवाब देते हुए कहा कि पिछले 7 सालों में पेपर लीक का कोई सबूत नहीं मिला है। NEET मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है...मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कह सकता हूं कि NTA के बाद 240 से अधिक परीक्षाएं सफलतापूर्वक आयोजित की गई हैं
NEET-UG 2024 Paper Leak: सुप्रीम कोर्ट NEET-UG 2024 परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ी से संबंधित मामलों की सुनवाई कर रहा है
NEET-UG 2024 Supreme Court Hearing: सुप्रीम कोर्ट ने विवादों में घिरी नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) UG 2024 से जुड़ी याचिकाओं पर सोमवार (22 जुलाई) को सुनवाई की। नीट-यूजी अभ्यर्थियों की ओर से पेश एक वकील ने शीर्ष अदालत को बताया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने क्वेश्चन पेपर लीक होने और लीक हुए क्वेश्चन पेपर को व्हाट्सएप के माध्यम से साझा किए जाने की बात स्वीकार की है। सुनवाई शुरू होने पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबीपारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने पक्षकारों के वकीलों से पूछा कि परीक्षा के केंद्रवार और शहरवार परिणाम घोषित करने से क्या सामने आया है।
सुप्रीम कोर्ट ने IIT दिल्ली के निदेशक को मंगलवार 23 जुलाई की दोपहर 12 बजे तक परीक्षा में एकसवाल के सही जवाब पर राय बनाने के लिए संबंधित विषय के तीन विशेषज्ञों की एक टीम गठित करने को कहा है। कुछ छात्रों ने सवाल के दो विकल्पों के लिए अंक देने के NTA के फैसले को चुनौती दी है। पेपर लीक और गड़बड़ी का आरोप लगाने वाले मामले की सुनवाई कल यानी 23 जुलाई को जारी रहेगी।
सुनवाई के दौरान CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि NEET पेपर लीक 4 मई से पहले हुआ था। नीट रिजल्ट के आंकड़ों का विश्लेषण करने से यह पता चला है कि क्वेश्चन पेपर लीक होने और अन्य अनियमितताओं से कथित रूप से लाभान्वित हुए अभ्यर्थियों का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है, लेकिन कुछ केंद्रों पर कई छात्रों ने परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन किया है। नीट-यूजी के परिणाम 5 जून को घोषित किए गए थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन्हें इस फॉर्मेट में प्रकाशित किया गया है।
नीट-यूजी में कथित अनियमितताओं के लिए जांच के दायरे में आए केंद्रों पर परीक्षा देने वाले अभ्यार्थियों का प्रदर्शन तुलनात्मक रूप से काफी खराब था। इन केंद्रों में झारखंड के हजारीबाग का ओएसिस स्कूल, हरियाणा के झज्जर का हरदयाल पब्लिक स्कूल और गुजरात के गोधरा का जय जलाराम इंटरनेशनल स्कूल शामिल है।
4 मई को लीक हुआ था पेपर?
याचिकाकर्ताओं-छात्रों के वकील की ओर से पेश वरिष्ठ वकील नरेंद्र हुड्डा ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि बिहार पुलिस की जांच के बयानों में कहा गया है कि लीक 4 मई को हुआ था। हुड्डा ने कहा कि हमने डेटा के आधार पर एक नोट पेश किया है। वे पेपर लीक होने की बात स्वीकार करते हैं। वे व्हाट्सएप पर वायरल करने की बात स्वीकार करते हैं। बिहार पुलिस की सामग्री से पता चलता है कि छात्रों को 4 तारीख को लीक पेपर दिए गए थे। लीक 5 मई की सुबह नहीं हुआ जैसा कि बताया गया था।
हुड्डा ने कहा कि उनका यह कहना कि यह घटना 5 तारीख की सुबह हुई, विश्वास करना कठिन है और यह बिहार पुलिस की रिपोर्ट के विपरीत है। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्रों के संबंधित बैंकों में जमा होने से पहले ही लीक हो गया। यानी 3 मई या उससे पहले। हुड्डा ने कहा कि यह कोई चपरासी नहीं है जो पेपर रूम में गया और 5-10 छात्रों को दे दिया। यह किसी गिरोह का काम था जो पहले भी ऐसा कर चुका है। संजीव मुखिया और बाकी सभी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
हुड्डा को जवाब देते हुए सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, "ई-रिक्शा द्वारा ले जाया गया प्रश्नपत्र एक स्थापित तथ्य है, लेकिन छोटी सी बात यह है कि जो तस्वीर वितरित की गई थी वह ओएमआर शीट की थी न कि प्रश्नपत्र की।" इस पर हुड्डा ने जवाब देते हुए कहा, "वे मानते हैं कि लीक हुआ है, वे मानते हैं कि व्हाट्सएप पर वायरल हुआ। बिहार पुलिस की जांच से पता चलता है कि लीक 4 मई को हुआ था और संबंधित बैंकों में प्रश्नपत्र जमा करने से पहले हुआ था।"
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अमित आनंद बिचौलिया है। वह 4 तारीख की रात को छात्रों को इकट्ठा कर रहा था ताकि 5 तारीख को पेपर मिल सके। 5 तारीख को पेपर मिलने वाली जगह पर नीतीश कुमार थे। बयान पढ़ने के बाद CJI ने कहा कि इससे पता चलता है कि छात्रों को 4 तारीख की रात को याद करने के लिए कहा गया था, जिसका मतलब है कि लीक 4 तारीख से पहले हुई थी।
रिजल्ट जारी
सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई को एनटीए को अभ्यर्थियों की पहचान गुप्त रखते हुए 20 जुलाई की दोपहर 12 बजे तक नीट-यूजी 2024 के केंद्रवार और शहरवार परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह इस बात का पता लगाना चाहता है कि कथित रूप से दागी केंद्रों पर परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को अन्य स्थानों के अभ्यर्थियों की तुलना में अधिक अंक मिले हैं या नहीं।
पीठ 40 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिनमें NTA द्वारा दायर याचिका भी शामिल है। एनटीएस ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं के संबंध में विभिन्न उच्च न्यायालयों में उसके खिलाफ लंबित मुकदमों को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया है।
5 मई को हुआ था एग्जाम
5 मई को 23.33 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने 571 शहरों के 4,750 केंद्रों पर नीट-यूजी परीक्षा दी थी। इन शहरों में 14 विदेशी शहर भी शामिल थे। केंद्र और NTA ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामों में कहा था कि बड़े पैमाने पर गोपनीयता के उल्लंघन के किसी भी सबूत के अभाव में परीक्षा को रद्द करना प्रतिकूल होगा और यह लाखों ईमानदार अभ्यर्थियों को गंभीर रूप से खतरे में डालेगा। देशभर के सरकारी और निजी मेडिकल संस्थानों में एमबीबीएस, बीडीएस, आयुष और अन्य संबंधित सब्जेक्ट में एडमिशन के लिए एनटीए द्वारा नीट-यूजी परीक्षा आयोजित की जाती है।
राहुल ने भारतीय परीक्षा प्रणाली को 'फ्रॉड' बताया, शिक्षा मंत्री ने किया पलटवार
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में कथित अनियमितता के विषय को लेकर सोमवार को सदन में सरकार पर प्रहार किया और दावा किया कि देश के करोड़ों छात्रों एवं देशवासियों को इस बात का यकीन हो गया है कि भारतीय परीक्षा प्रणाली एक फ्रॉड (धोखे वाली) है तथा जिसके पास पैसा है वह इस पूरी प्रणाली को खरीद सकता है। इस पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पलटवार किया और सवाल किया कि क्या 2010 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने शिक्षा में सुधार से जुड़ा विधेयक निजी मेडिकल कॉलेजों के दबाव में वापस ले लिया था?
उन्होंने यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पूरी परीक्षा प्रणाली को बकवास कहना दुर्भाग्यपूर्ण है। सदन में प्रश्नकाल के दौरान नीट के विषय पर पूरक प्रश्न पूछते हुए राहुल गांधी ने कहा, "परीक्षा प्रणाली में बहुत खामियां हैं। मंत्री ने अपने आपको छोड़कर, सबको जिम्मेदार ठहराया है...मुझे नहीं लगता कि जो चल रहा है, उसकी बुनियादी जानकरी भी उन्हें है।" उन्होंने दावा किया कि करोड़ों छात्र आज चिंतित हैं तथा उन्हें इस बात का यकीन हो गया है कि भारतीय परीक्षा प्रणाली एक 'फ्रॉड' है।
कांग्रेस नेता ने कहा, "करोड़ों लोगों का मानना है कि अगर आपके पास पैसा है, आप अमीर हैं तो आप भारतीय परीक्षा प्रणाली को खरीद सकते हैं। यही भावना विपक्ष की भी है।" उन्होंने सवाल किया कि सरकार व्यवस्थागत स्तर पर चीजों को दुरुस्त करने के लिए क्या कर रही है? इस पर प्रधान ने कहा, "मुझे बौद्धिकता और संस्कार का प्रमाणपत्र किसी से नहीं चाहिए। देश के लोकतंत्र ने हमारे प्रधानमंत्री को चुना है मैं उनके निर्णय से यहां जवाब दे रहा हूं।"
शिक्षा मंत्री ने कहा, "यह कहा गया कि देश की भारतीय परीक्षा प्रणाली बकवास है, इससे दुर्भाग्यपूर्ण बयान कुछ नहीं हो सकता। मैं इसकी निंदा करता हूं।" उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा, "जिन्होंने रिमोट से सरकारें चलाई हैं, उनके समय के शिक्षा मंत्री 2010 में तीन विधेयक लेकर आए थे, उनमें एक विधेयक शिक्षा में सुधार से जुड़ा विधेयक था।"
प्रधान का कहना था, "हमारी सरकार की हिम्मत है कि हमने (पेपर लीक पर) कानून बनाया, लेकिन कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष की क्या मजबूरी थी कि उनके समय लाए गए विधेयक को वापस लिया गया? क्या निजी मेडिकल कॉलेज और उनकी घूसखोरी के दबाव में इसे वापस लिया गया था?"