NEET UG MBBS Rules: भारत में 12वीं के बाद डॉक्टर बनने का सपना लाखों स्टूडेंट्स देखते हैं। 5 साल के एमबीबीएस कोर्सट को पूरा करने के लिए कुछ खास नियम होते हैं जिन्हें NMC यानि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग डिसाइड करता है। इसमें परीक्षा पास करने के अटेंप्ट से लेकर, इंटर्नशिप और काउंसलिंग और एडमिशन से जुड़े नियम होते हैं। पहले ये नियम था कि अगर आप MBBS के किसी भी ईयर में फेल होते हैं तो आपको दोबारा पेपर देने होंगे। हलांकि अब NMC ने इस रूल में बदलाव कर दिया है।
कोर्स को करें जल्द से जल्द पूरा
NMC ने NEET का रिजल्ट जारी होने से पहले मेडिकल से जुड़े नियम बदल दिए हैँ। MBBS के छात्रों को कोर्स एडमिशन के 9 साल के भीतर पूरा करना होगा। फर्स्ट ईयर के एग्जाम क्लियर करने के लिए स्टूडेंट्स को चार अटेंप्ट दिए जाएंगे। ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन 2023 यानी GIMR-23 के मुताबिक NEET-UG मेरिट लिस्ट के आधार पर सभी मेडिकल संस्थानों में एक कॉमन काउंसलिंग होगी। NMC ने नोटिफिकेशन में बताया कि किसी भी हाल में स्टूडेंट को फर्स्ट ईयर MBBS के लिए चार से ज्यादा अटेंप्ट नहीं दिए जाएंगे। स्टूडेंट्स को 9 सालों के बाद ग्रेजुएट कोर्स जारी रखने की परमिशन नहीं दी जाएगी।
इंटर्नशिप के बिना नहीं मिलेगी डिग्री
अब इंटर्नशिप पूरी करना पहले से भी ज्यादा जरूरी हो गया है। कंप्लसरी रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप रेगुलेशन 2021 के मुताबिक ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन लेने वाले सभी स्टूडेंट्स को इंटर्नशिप पूरी करनी होगी। बिना इंटर्नशिप के उनका ग्रेजुएट कोर्स पूरा नहीं माना जाएगा। नोटिफिकेशन के मुताबिक काउंसलिंग NMC द्वारा प्रदान की गई सीटों पर बेस्ड होगी। जरूरत के हिसाब से कॉमन काउंसलिंग कई फेज में की जा सकती है। UGMIB अंडर ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड कॉमन काउंसलिंग के लिए दिशानिर्देश जारी करेगा। सरकार काउंसलिंग के लिए एक अथॉरिटी को चुनेगी। कोई भी मेडिकल इंस्टीट्यूट इन नियमों का उल्लंघन करके किसी भी उम्मीदवार को ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन में एडमिशन नहीं देगा।