संजीव कुमार ने खुद ही की थी अपनी मौत की भविष्यवाणी! शोले की शूटिंग के दौरान हेमा मालिनी को किया था प्रपोज, जिवन भर रहे कुंवारे
9 जुलाई, 1938 को गुजरात के सूरत में जन्मे संजीव कुमार का असली नाम हरिहर जेठालाल जरीवाला था। बाद में वह अपने परिवार के साथ मुंबई चले गए। उनके शुरुआती सालों में अभिनय के प्रति जुनून था, जिसके कारण उन्होंने फिल्म स्कूल में दाखिला लिया। गुजराती, हिंदी और अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में निपुण, कुमार के दो छोटे भाई और एक बहन थे
संजीव कुमार ने खुद ही की थी अपनी मौत की भविष्यवाणी! शोले की शूटिंग के दौरान हेमा मालिनी को किया था प्रपोज
संजीव कुमार बॉलीवुड के एक जानेमाने अभिनेता, जो बड़ी गहराई के साथ पुराने किरदानों को निभाने के लिए जाने जाते थे। भले ही फिल्मी दुनिया में उन्होंने अपार सफलता हासिल की हो, लेकिन उनके निजी जीवन में दुख रहे, क्योंकि उन्होंने कभी शादी नहीं की। इसके पीछे एक बड़ा ही अनोखा किस्सा भी है। ये बात शोले फिल्म की शूटिंग के दौरान की है, जब संजीव कुमार ने अभिनेत्री हेमा मालिनी को प्रपोज किया, लेकिन हेमा मालिनी ने उसे ठुकरा दिया, जिसके कारण उन्हें जीवन भर अकेले रहना पड़ा।
इतना ही नहीं संजीव कुमार ने खुद ही अपनी जल्दी मृत्यु की भविष्यवाणी तक कर डाली थी, उन्होंने कहा था कि वह अपने परिवार के दूसरे पुरुषों की तरह 50 साल से ज्यादा नहीं जी पाएंगे। दुखद यह है कि यह तब सच साबित हुई, जब 1985 में दिल का दौरा पड़ने से 47 साल की उम्र में उनका निधन हो गया और वह अपने पीछे एक सिनेमाई विरासत छोड़ गए।
प्रारंभिक जीवन और कैरियर की शुरुआत
9 जुलाई, 1938 को गुजरात के सूरत में जन्मे संजीव कुमार का असली नाम हरिहर जेठालाल जरीवाला था। बाद में वह अपने परिवार के साथ मुंबई चले गए। उनके शुरुआती सालों में अभिनय के प्रति जुनून था, जिसके कारण उन्होंने फिल्म स्कूल में दाखिला लिया। गुजराती, हिंदी और अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में निपुण, कुमार के दो छोटे भाई और एक बहन थे।
कुमार ने मंच पर अपनी अभिनय यात्रा IPTA (इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन) और इंडियन नेशनल थिएटर के साथ नाटकों में प्रदर्शन करके शुरू की।
उनके फिल्मी करियर की शुरुआत 1960 में हम हिंदुस्तानी से हुई, लेकिन 1965 में आई निशान में उनके रोल के बाद ही उन्हें पहचान मिलनी शुरू हुई।
उनके करियर में महत्वपूर्ण मोड़ 1970 में 'खिलौन' की सफलता के साथ आया, जिसने उन्हें स्टारडम की ओर बढ़ा दिया और उन्हें अपनी पीढ़ी के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक बना दिया।
एक शानदार फिल्मी कैरियर
संजीव कुमार की अभिनय क्षमता सचमुच अद्वितीय थी। अपने जमाने के दूसरे एक्टर्स के उलट, वह ऐसी भूमिकाएं चुनने के लिए जाने जाते थे, जिनमें वो अपने से ज्यादा उम्र के किसी शख्स का किरदार निभाते थे।
डायरेक्टर गुलजार के साथ उनके सहयोग से 1972 में परिचय, कोशिश (1973), और आंधी (1975) जैसी फिल्मों में उनका सबसे बेहतरीन प्रदर्शन सामने आया। कोशिश में एक गूंगे-बेहरे व्यक्ति के कुमार के किरदार को देख आलोचक भी उनकी तारीफ करने को मजबूर हो गए, जिससे एक वर्सेटाइल और डेडिकेटेड एक्टर के रूप में उनकी इमेज और मजबूत हुई।
उन्होंने अपने समय की कई बड़ी अभिनेत्रियों के साथ स्क्रीन शेयर की, जिनमें हेमा मालिनी, राखी और मौसमी चटर्जी शामिल हैं। उम्रदराज़ और युवा दोनों किरदारों को बड़ी ही सहजता से निभाने की संजीव कुमार की क्षमता उनके करियर की एक निर्णायक विशेषता बन गई।
हेमा मालिनी के लिए एकतरफा प्यार
संजीव कुमार का निजी जीवन अक्सर उनकी फिल्मी भूमिकाओं की तरह ही नाटकीय था। सबसे दिलचस्प था बॉलीवुड की "ड्रीम गर्ल" हेमा मालिनी के लिए उनका एकतरफा प्यार।
शोले की शूटिंग के दौरान, संजीव कुमार ने कथित तौर पर मालिनी के सामने शादी का प्रस्ताव रखा, इस बात से अनजान कि वह पहले से ही उसी फिल्म के एक और स्टार धर्मेंद्र को डेट कर रही थीं। लेकिन हेमा मालिनी ने उनका प्रपोजल ठुकरा दिया, जिससे उनका दिल टूट गया।
इसके बाद संजीव कुमार ने जीवन भर शादी नहीं करने का फैसला किया। हेमा मालिनी के साथ उनकी अधूरी प्रेम कहानी बहुत अटकलों का विषय बन गई, हालांकि कुमार ने खुद सार्वजनिक रूप से शायद ही कभी इस पर चर्चा की हो। अकेले रहने के उनके फैसले ने उनके निजी जीवन को और भी रहस्यमयी बना लिया।
"मैं 50 से ज्यादा नहीं जीने वाला"
संजीव कुमार के जीवन के सबसे भयावह पहलुओं में से एक उनकी अपनी ही मृत्यु को लेकर की गई भविष्यवाणी थी। उम्रदराज़ किरदार निभाने के लिए जाने जाने वाले कुमार ने एक बार ऐसी भूमिकाओं के प्रति अपनी पसंद के बारे में मजाक करते हुए कहा था, “मैं बूढ़ा नहीं होने वाला हूं, क्योंकि मैं अपने परिवार के पुरुषों की तरह 50 से ज्यादा नहीं जी पाऊंगा। इसलिए, मैं स्क्रीन पर बुढ़ापे का अनुभव भी कर सकता हूं।"
लेकिन किसे पता था कि उनकी मजाक में कही गई ये बात सच साबित हो जाएगी। संजीव कुमार को दिल की एक ऐसी बीमारी थी, जो उन्हें अपने बुजुर्गों से मिली थी, जिसने उनके परिवार के कई पुरुषों की 50 साल की उम्र से पहले ही जान ले ली थी।
अमेरिका में बाईपास सर्जरी कराने के बावजूद उनका स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ता गया। जैसा कि उन्होंने भविष्यवाणी की थी, 6 नवंबर 1985 को 47 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।
विरासत जिंदा है
उनके असामयिक निधन के बाद भी, भारतीय सिनेमा में संजीव कुमार की विरासत जिंदा रही। उनकी कई फिल्में उनके निधन के बाद रिलीज हुईं, और डायरेक्टरों को उनके बाद स्क्रिप्ट को एडजस्ट करना पड़ा।
उनकी आखिरी अधूरी फिल्म, प्रोफेसर की पड़ोसन (1993) थी। कुमार निधन के बाद फिल्म में उनके किरदार में बदलाव किया गया।
अपने करियर के दौरान, कुमार ने दस से ज्यादा भाषाओं में काम किया और ऐसे प्रदर्शन दिए, जो पीढ़ियों से दर्शकों को पसंद आए। वह अलग-अलग तरह के किरदारों को निभाने की अपनी क्षमता के लिए जाने गए। उनकी मृत्यु से बॉलीवुड में एक युग का अंत हो गया, लेकिन भारतीय सिनेमा में उनका योगदान बेजोड़ है।