Heatwave: बारिश के बाद चिलचिलाती गर्मी के लिए रहें तैयार, अब कहर ढाने को तैयार है अल नीनो

Heatwave in India: मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि बारिश के बाद अब चिलचिलाती गर्मी के लिए देशवासी तैयार रहें। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अप्रैल-मई महीने में भीषण गर्मी (Heatwave) पड़ने वाली है। रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का न सिर्फ लोगों के हेल्थ पर असर पड़ेगा, बल्कि देश के कई राज्यों में सूखे की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है

अपडेटेड Mar 22, 2023 पर 2:23 PM
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Heatwave in India: इस साल 2023 का फरवरी महीना 122 सालों में सबसे गर्म महीना रहा

Heatwave in India: मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि बारिश के बाद अब चिलचिलाती गर्मी (Scorching Summer) के लिए देशवासी तैयार रहें। इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) के मुताबिक, इस साल 2023 का फरवरी महीना 122 सालों में सबसे गर्म महीना रहा। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अप्रैल-मई महीने में भीषण गर्मी (Heatwave) पड़ने वाली है। रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का न सिर्फ लोगों के हेल्थ पर असर पड़ेगा, बल्कि देश के कई राज्यों में सूखे की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। हाल ही में IMD के एक वैज्ञानिक ने आने वाले गर्मी को लेकर दिए चेतावनी देते हुए कहा था कि अल नीनो मौसमी घटना के कारण इस साल मानसून की बारिश काफी कम रहने की आशंका है।

इस साल भीषण गर्मी पड़ने की संभावना

इस साल सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने और अप्रैल के पहले सप्ताह में सिंधु-गंगा मैदान एवं पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से दो से तीन डिग्री सेल्सियस अधिक तापमान दर्ज किए जाने की आशंका है। IMD ने बताया कि पूर्वी एवं मध्य भारत और पूर्वोत्तर भारत के अधिकतर हिस्सों एवं पश्चिमोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है।


मौसम विभाग ने गर्मियों के असर को कम करने के लिए उठाए जा सकने वाले कदमों की समीक्षा के लिए बुलाई गई एक बैठक में बताया कि मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत में सिंधु-गंगा के मैदान और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य से दो से तीन डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज होने की आशंका है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने कहा कि चूंकि तापमान सामान्य से अधिक रहने की आशंका है, इसलिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इससे निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी करनी चाहिए।

अल नीनो की वापसी

मौसम विभाग के मुताबिक, ला नीना (La Nina) के बाद अब अल नीनो (El Nino) कहर ढाने को तैयार है। प्रशांत महासागर की समुद्री सतह का तापमान फिर से गर्म होने लगा है। रिपोर्ट के अनुसार इन दोनों टर्म का संदर्भ प्रशांत महासागर की समुद्री सतह के तापमान में होने वाले बदलावों से है। इस तापमान का असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है। एक तरफ अल नीनो है जिसके कारण तापमान गर्म होता है, तो वहीं ला नीना के कारण तापमान ठंडा होता है।

क्या होता है अल नीनो और ला नीना?

वैज्ञानिकों के मुताबिक, प्रशांत महासागर में पेरू के निकट समुद्री तट के गर्म होने की घटना को अल-नीनो कहा जाता है। समुद्र का तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों में जो बदलाव आते हैं उस समुद्री घटना को अल नीनो कहा जाता है। इस बदलाव की वजह से समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 4-5 डिग्री ज्यादा हो जाता है।

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वहीं, ला नीना के असर दुनियाभर में आने वाले साइक्लोन पर असर होता है। ये अपनी गति के साथ उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की दिशा को बदल सकती है। जिसके कारण दक्षिण-पूर्व एशिया और उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में बहुत ज्यादा नमी वाली स्थिति पैदा होती है।

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