'भारत एक नई उड़ान भरने की कगार पर है। देशवासी चाहते हैं कि यह उड़ान तेज हो।' यह बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने एक इंटरव्यू में कही हैं। बता दें कि देश में साल 2024 में आम चुनाव होने वाले हैं। कई भारतीयों और वैश्विक नेताओं को उम्मीद है कि भारत की केंद्र सरकार में एक बार फिर मोदी आएंगे। पीएम मोदी भी आम चुनावों में एक बार फिर बीजेपी की जीत को लेकर कम आश्वस्त नहीं हैं। हाल ही में हुए राज्य चुनावों में 3 राज्यों- मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बीजेपी के शानदार जीत दर्ज करने के बाद यह विश्वास और भी मजबूत हो गया है।
पीएम मोदी का कहना है कि आज, भारत के लोगों की 10 साल पहले की तुलना में बहुत अलग आकांक्षाएं हैं। उन्हें एहसास है कि हमारा देश उड़ान भरने की कगार पर है। वे चाहते हैं कि यह उड़ान तेज हो और वे जानते हैं कि इसके लिए सबसे अच्छी पार्टी वह है, जो उन्हें यहां तक लेकर आई है। भारत के लोकतंत्र को लेकर व्याप्त चिंताओं पर पीएम मोदी ने कहा कि हमारे आलोचक अपनी राय रखने और उन्हें व्यक्त करने की आजादी के हकदार हैं। लेकिन अक्सर आलोचना के तौर पर कुछ ऐसे आरोप/दावे सामने आते हैं, जो न केवल भारतीय लोगों की बुद्धिमत्ता का अपमान करते हैं, बल्कि विविधता और लोकतंत्र जैसे मूल्यों के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को भी कम आंकते हैं।
एक दूसरे पर निर्भर है विश्व
मोदी कार्यकाल के दौरान पिछले लगभग 10 वर्षों में भारत ने अपने पुराने दोस्तों से तो रिश्ते मजबूत बनाए ही हैं, साथ ही कुछ नए राष्ट्रों के साथ भी दोस्ती की है। अगस्त 2023 में भारत ने जी20 शिखर सम्मेलन की अगुवाई की और दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं की मेजबानी की। इसके पीछे मकसद था दुनिया के सामने भारत की स्थिति को ऊपर उठाना। भारत की विदेश नीतियों को लेकर पीएम मोदी ने इंटरव्यू में कहा कि दुनिया एक-दूसरे से जुड़ी होने के साथ-साथ एक-दूसरे पर निर्भर भी है। विदेशी मामलों में हमारा सबसे महत्वपूर्ण मार्गदर्शक सिद्धांत हमारा राष्ट्रीय हित है। यह रुख हमें विभिन्न देशों के साथ इस तरीके से जुड़ने की अनुमति देता है, जिसमें आपसी हितों का सम्मान हो और कंटेंपरेरी जियोपॉलिटिक्स की जटिलताओं को स्वीकार किया जाए।
आज भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
अपने 10 वर्षों के कार्यकाल के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर विकास के बारे में पीएम मोदी ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था ने "फ्रैजाइल फाइव" (2013 में मॉर्गन स्टेनली की ओर से इस कैटेगरी में रखा गया) से दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तक का सफर तय किया है। फ्रैजाइल, उन अर्थव्यवस्थाओं को कहा जाता है, जो अपने चालू खाते के घाटे को पूरा करने के लिए विदेशी निवेश पर अत्यधिक निर्भर हों।
मोदी कार्यकाल में इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में तेजी आई है। आंकड़ों पर गौर करें तो एक दशक से भी कम समय में हवाई अड्डों की संख्या 74 से दोगुनी होकर 149 हो गई; मेट्रो लाइनें आज 905 किमी हैं, जो एक दशक पहले 248 किमी थीं, वहीं मेडिकल कॉलेज की संख्या आज 706 है, जो मोदी के सत्ता में आने से पहले 387 थी। Apple और उसकी सप्लायर फॉक्सकॉन सहित बहुराष्ट्रीय कंपनियां, मैन्युफैक्चरिंग और असेंबलिंग के लिए भारत यूनिट लगा रही हैं।
रोजगार के मुद्दे पर क्या बोले?
भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में बड़े पैमाने पर हुए विकास के बावजूद नौकरियों में कमी को लेकर चिंताएं हैं। हालांकि कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि बेरोजगारी पर भारत का डेटा अपर्याप्त है, वहीं विपक्ष इस पर लगातार बीजेपी को घेरता आ रहा है। इस मुद्दे पर पीएम मोदी का कहना है कि देश में बेरोजगारी दर लगातार घट रही है। उनके मुताबिक, उत्पादकता और इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार जैसे विभिन्न परफॉरमेंस पैरामीटर्स का मूल्यांकन करने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि एक विशाल और युवा राष्ट्र भारत में एंप्लॉयमेंट जनरेशन में वास्तव में तेजी आई है।