Industrial production for January : सरकार द्वारा 12 मार्च को जारी आंकड़ों के मुताबिक भारत का औद्योगिक उत्पादन जनवरी में बढ़कर आठ महीने के उच्चतम स्तर 5 फीसदी पर पहुंच गया। पिछले महीने ये आंकड़ा 3.5 फीसदी पर रहा है। यह आंकड़ा मनीकंट्रोल पोल के 3.5 फीसदी के पूर्वानुमान से ज्यादा है। इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन इंडेक्स में (IIP) अब तक धीमापन बना हुआ है। तीसरी तिमाही में औद्योगिक विकास दर पिछली तिमाही के 2.7 फीसदी से बढ़कर 4 फीसदी हो गई है। जनवरी में कोर सेक्टर का प्रदर्शन खराब रहा। इंफ्रास्ट्रक्चक इंडस्ट्रीज की विकास दर पिछले महीने के 4.8 फीसदी से घटकर 4.6 फीसगी रह गई। इसके चलते कोर सेक्टर का प्रदर्शन खराब रहा है।
जनवरी में इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर का ग्रोथ दिसंबर के 6.2 फीसदी से घटकर 2.4 फीसदी पर रही है। प्राइमरी गुड्स की ग्रोथ पिछले महीने के 3.8 फीसदी से बढ़कर 5.5 फीसदी पर रही है। जनवरी में कैपिटल गुड्स की ग्रोथ दिसंबर के 10.4 फीसदी से घटकर 7.8 फीसदी पर रही है। जबकि इंफ्रा गुड्स की ग्रोथ दिसंबर को 7.4 फीसदी से घटकर 7 फीसदी पर रही है।
जनवरी में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की ग्रोथ पिछले महीने के 8.3 फीसदी से घटकर 7.2 फीसदी पर रही है। वहीं, कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स की ग्रोथ बढ़कर -0.2 फीसदी पर रही है। इसी तरह जनवरी में माइनिंग सेक्टर की ग्रोथ दिसंबर के 2.7 फीसदी से बढ़कर 4.4 फीसदी पर रही है।
गौरतलब है कि कोर इंडस्ट्रीज की आईआईपी में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी होती है। बेहतर जनवरी के बावजूद, भारत के मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ वित्त वर्ष 2025 में निराशाजनक रहने की संभावना है। दूसरे अग्रिम अनुमानों में पिछले वर्ष के 12.3 प्रतिशत के मुकाबले 4.3 प्रतिशत की बढ़त का अनुमान लगाया गया है। भारत के मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर ने तीसरी तिमाही में 3.5 फीसदी की बढ़त दर्ज की है, जबकि इसी अवधि में अर्थव्यवस्था में 6.2 प्रतिशत की ग्रोथ देखने को मिली है।