जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में तैनात जवानों की नहीं होगी गिरफ्तारी, 370 हटाने के बाद सरकार का एक और बड़ा फैसला

जम्मू-कश्मीर में तीन साल पहले तक 'रणबीर दंड संहिता 1989' लागू थी, जिसके कारण CrPC, 1973 की धारा 45 के तहत सशस्त्र बलों के जवानों को गिरफ्तारी से सुरक्षा नहीं मिली थी। वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने कहा कि जवानों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा सकता है, लेकिन जब वे ड्यूटी पर तैनात होंगे तो गिरफ्तारी के लिए अधिक कानूनी प्रक्रिया की आवश्यकता होगी

अपडेटेड May 03, 2023 पर 11:24 AM
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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सेना के अलावा जितने भी केंद्रीय बल हैं, उन सभी के जवानों को गिरफ्तारी से संरक्षण मिलेगा

भारतीय सेना (Indian Army) के जवानों को जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के साथ-साथ लद्दाख (Ladakh) में भी अब गिरफ्तारी से सुरक्षा मिलेगी। केंद्र सरकार की तरफ से जारी यह आदेश केंद्रीय अर्धसैनिक बलों पर भी लागू होगा। जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 की समाप्ति के बाद इस प्रोटेक्शन का प्रावधान किया गया है। अब केंद्र सरकार की सहमति के बिना जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में तैनात किसी भी जवान की गिरफ्तारी नहीं हो सकेगी। सूत्रों ने न्यूज 18 को बताया कि किसी भी जवान को कोई नई शक्ति नहीं दी गई है, बल्कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में तैनात सभी बलों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की एक धारा का विस्तार किया गया है।

जम्मू-कश्मीर में तीन साल पहले तक 'रणबीर दंड संहिता 1989' लागू थी, जिसके कारण CrPC, 1973 की धारा 45 के तहत सशस्त्र बलों के जवानों को गिरफ्तारी से सुरक्षा नहीं मिली थी। वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने कहा कि जवानों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा सकता है, लेकिन जब वे ड्यूटी पर तैनात होंगे तो गिरफ्तारी के लिए अधिक कानूनी प्रक्रिया की आवश्यकता होगी।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पहले यह केवल सशस्त्र बलों के लिए था, लेकिन अब यह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में तैनात सभी बलों के लिए लागू होगा। यानी भारतीय सेना के जवानों के अलावा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को भी गिरफ्तारी से संरक्षण मिलेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर के कानून, न्याय और संसदीय मामलों के विभाग से चर्चा करने के बाद इस प्रपोजल को अपनी मंजूरी दे दी है। साथ ही गृह मंत्रालय ने भारत सरकार के विधि और न्याय मंत्रालय से इस मामले पर सलाह ली थी।


आदेश में कहा गया है कि राज्य सरकार भी अपने पुलिस बलों एवं फोर्स को उक्त सेक्शन के सब सेक्शन (1) के अंतर्गत सुरक्षा दे सकती है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सेना के अलावा जितने भी केंद्रीय बल हैं, उन सभी के जवानों को गिरफ्तारी से संरक्षण मिलेगा। बता दें कि पहले स्थानीय पुलिस-प्रशासन एवं जवानों के साथ तनातनी रही है। जवानों को हिरासत में लेने जैसी घटनाएं हुई हैं। ऐसे गंभीर मामलों में अपने जवानों का बचाव करने के लिए सेना, स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस के साथ सख्ती से पेश आई है।

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आपको बता दें कि आर्टिकल 370 हटने से पहले जम्मू-कश्मीर में में रणबीर पीन कोड 1989 लागू था। इसके चलते केंद्र सरकार के कई कानून वहां पर लागू नहीं हो सकते थे। अगस्त 2019 में जब धारा 370 हटाया गया तो सशस्त्र बलों के जवानों को ड्यूटी के दौरान हुई किसी घटना में गिरफ्तारी से छूट देने का रास्ता साफ हो गया। कश्मीर में कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें सशस्त्र बलों के जवानों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है।

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