Manipur Violence: जातीय संघर्ष से प्रभावित मणिपुर में 1,000 से अधिक लोगों की भीड़ ने गुरुवार देर रात केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री आरके रंजन सिंह (RK Ranjan Singh) के इंफाल स्थित आवास में आग लगा दी। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों और दमकल कर्मियों ने इंफाल के कोंगबा स्थित मंत्री के आवास को बचाने के लिए पूरी कोशिश की। इससे पहले, इंफाल के बीचों-बीच गुरुवार दोपहर को मणिपुर द्रुत कार्य बल और भीड़ के बीच झड़पें हुई थीं और भीड़ ने दो घरों को आग लगा दी थी। मणिपुर में झड़प और हमलों के मामले इस सप्ताह फिर से सामने आए हैं।
अधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय मंत्री आरके रंजन सिंह घटना के वक्त इंफाल स्थित अपने घर में नहीं थे। इंफाल में कर्फ्यू के बावजूद भीड़ कोंगबा में मंत्री के घर तक पहुंचने में कामयाब रही। घटना के समय मंत्री के आवास पर 9 सुरक्षा एस्कॉर्ट कर्मी, 5 सुरक्षा गार्ड और 8 अतिरिक्त गार्ड ड्यूटी पर थे।
मंत्री के आवास पर मौजूद एक सुरक्षाकर्मी ने कहा कि हमले के दौरान भीड़ ने चारों दिशाओं से पेट्रोल बम फेंके। एस्कॉर्ट कमांडर ने कहा कि भीड़ में करीब 1,200 लोग शामिल थे। यह दूसरी बार है जब मंत्री के घर पर भीड़ ने हमला किया है।
मई में हुए हमले के दौरान भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने हवा में गोलियां चलाई थीं। केंद्रीय मंत्री आरके रंजन सिंह ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, ''मैं स्तब्ध हूं। मणिपुर में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह विफल हो गई है।"
दो आम लोगों के घरों में लगाई आग
इससे पहले मणिपुर में गुरुवार को दिन में भीड़ ने कम से कम दो घरों में आग लगा दी। अधिकारियों ने बताया कि इस दौरान सुरक्षा बलों ने इंफाल के न्यू चेकॉन में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया और भीड़ पर आंसू गैस के गोले छोड़े। यह घटना ऐसे समय हुई जब सेना और असम राइफल्स के जवानों ने राज्य में हिंसा बढ़ने के बाद अपना अभियान तेज कर दिया है। सेना की टुकड़ियों ने गश्त बढ़ा दी हैं और जहां भी अवरोध लगाए गए थे, उन्हें हटा दिया गया है।
महिला मंत्री के सरकारी आवास में लगाई आग
इसके अलावा इंफाल पश्चिम जिले के लाम्फेल इलाके में बुधवार रात अज्ञात उपद्रवियों ने मणिपुर की महिला मंत्री नेमचा किपजेन (Nemcha Kipgen) के आधिकारिक आवास में आग लगा दी। अधिकारियों ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विधायक के घर में कोई भी मौजूद नहीं था, जब उसे जलाया गया था। इससे पहले कि यह आसपास की इमारतों में फैलती, दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पा लिया। किपगेन कुकी समुदाय की नेता हैं। आग लगने की जिम्मेदारी अभी किसी ग्रुप ने नहीं ली है।
कांगपोकपी सीट का प्रतिनिधित्व करने वाली किपगेन मणिपुर कैबिनेट में एकमात्र महिला मंत्री हैं। वह उन 10 कुकी विधायकों में शामिल थीं, जिन्होंने 12 मई को समुदाय के लिए एक अलग प्रशासन बनाने के लिए केंद्र से आग्रह किया था।
एक महीने पहले मणिपुर में मेइती और कुकी समुदाय के लोगों के बीच हुई जातीय हिंसा में 100 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। राज्य में शांति बहाल करने के लिए सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है। मणिपुर के 11 जिलों में कर्फ्यू लागू है, जबकि इंटरनेट सेवाएं निलंबित हैं।
मणिपुर में 3 मई से मेइती और कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष हो रहा है। मणिपुर में अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में 3 मई को पर्वतीय जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के आयोजन के बाद झड़पें हुई थीं। मणिपुर की 53 प्रतिशत आबादी मेइती समुदाय की है और ये मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं। आदिवासियों यानी नागा और कुकी की आबादी 40 प्रतिशत है और ये पर्वतीय जिलों में रहते हैं।