Manipur Violence: जातीय संघर्ष से प्रभावित मणिपुर में गुरुवार को भीड़ ने कम से कम दो घरों में आग लगा दी। अधिकारियों ने बताया कि इस दौरान सुरक्षा बलों ने इंफाल के न्यू चेकॉन में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया और भीड़ पर आंसू गैस के गोले छोड़े। यह घटना ऐसे समय हुई जब सेना और असम राइफल्स के जवानों ने राज्य में हिंसा बढ़ने के बाद अपना अभियान तेज कर दिया है। सेना की टुकड़ियों ने गश्त बढ़ा दी हैं और जहां भी अवरोध लगाए गए थे, उन्हें हटा दिया गया है।
सेना ने एक ट्वीट में कहा कि हाल में हिंसा में वृद्धि के बाद सेना और असम राइफल्स के अभियान में तेजी लाई जा रही है। एक दिन पहले ही राज्य के खमेनलोक इलाके के एक गांव में उपद्रवियों के हमले में 9 लोगों की मौत हो गई थी और 10 घायल हो गए थे। खमेनलोक इलाके में एक कुकी गांव में बुधवार तड़के हुए हमले के बाद सुरक्षा बलों ने अपने अभियान को फिर से तेज कर दिया है।
एक महीने पहले मणिपुर में मेइती और कुकी समुदाय के लोगों के बीच हुई जातीय हिंसा में 100 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। राज्य में शांति बहाल करने के लिए सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है। मणिपुर के 11 जिलों में कर्फ्यू लागू है, जबकि इंटरनेट सेवाएं निलंबित हैं।
मंत्री के सरकारी आवास में लगाई आग
इंफाल पश्चिम जिले के लाम्फेल इलाके में बुधवार रात अज्ञात उपद्रवियों ने मणिपुर की महिला मंत्री नेमचा किपजेन (Nemcha Kipgen) के आधिकारिक आवास में आग लगा दी। अधिकारियों ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विधायक के घर में कोई भी मौजूद नहीं था, जब उसे जलाया गया था। इससे पहले कि यह आसपास की इमारतों में फैलती, दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पा लिया। किपगेन कुकी समुदाय की नेता हैं। आग लगने की जिम्मेदारी अभी किसी ग्रुप ने नहीं ली है।
कांगपोकपी सीट का प्रतिनिधित्व करने वाली किपगेन मणिपुर कैबिनेट में एकमात्र महिला मंत्री हैं। वह उन 10 कुकी विधायकों में शामिल थीं, जिन्होंने 12 मई को समुदाय के लिए एक अलग प्रशासन बनाने के लिए केंद्र से आग्रह किया था। मणिपुर में 3 मई से मेइती और कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष हो रहा है।
मणिपुर में अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में 3 मई को पर्वतीय जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के आयोजन के बाद झड़पें हुई थीं। मणिपुर की 53 प्रतिशत आबादी मेइती समुदाय की है और ये मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं। आदिवासियों यानी नागा और कुकी की आबादी 40 प्रतिशत है और ये पर्वतीय जिलों में रहते हैं।