Manipur Violence: इंफाल पश्चिम जिले के लाम्फेल इलाके में बुधवार रात अज्ञात उपद्रवियों ने मणिपुर की महिला मंत्री नेमचा किपजेन (Nemcha Kipgen) के आधिकारिक आवास में आग लगा दी। अधिकारियों ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विधायक के घर में कोई भी मौजूद नहीं था, जब उसे जलाया गया था। इससे पहले कि यह आसपास की इमारतों में फैलती, दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पा लिया। किपगेन कुकी समुदाय की नेता हैं। आग लगने की जिम्मेदारी अभी किसी ग्रुप ने नहीं ली है।
कांगपोकपी सीट का प्रतिनिधित्व करने वाली किपगेन मणिपुर कैबिनेट में एकमात्र महिला मंत्री हैं। वह उन 10 कुकी विधायकों में शामिल थीं, जिन्होंने 12 मई को समुदाय के लिए एक अलग प्रशासन बनाने के लिए केंद्र से आग्रह किया था।
मणिपुर में 3 मई से मेइती और कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष हो रहा है। इस हिंसा में 100 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 300 से अधिक घायल हुए हैं। जबकि हिंसा की वजह से हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। करीब 60,000 लोगों ने 350 राहत शिविरों में शरण ली है।
इससे पहले अधिकारियों ने बताया कि जातीय संघर्ष से प्रभावित मणिपुर के खमेनलोक इलाके के एक गांव में मंगलवार को संदिग्ध बदमाशों के हमले में 9 लोगों की मौत हो गई और 10 घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले, मंगलवार देर रात करीब एक बजे हथियारबंद बदमाशों ने इंफाल पूर्वी जिले और कांगपोकी जिले की सीमा से लगे खमेनलोक क्षेत्र के कुकी गांव को घेरकर हमला शुरू कर दिया।
इसके बाद हुई गोलीबारी में दोनों पक्षों के लोग हताहत हो गए। यह क्षेत्र मेइती-बहुल इंफाल पूर्वी जिले और आदिवासी बहुल कांगपोकपी जिले की सीमाओं के पास स्थित है। इस बीच, जिला अधिकारियों ने इंफाल पूर्वी जिले और इंफाल पश्चिम जिले में कर्फ्यू में छूट के घंटे कम कर दिए हैं। पहले यह छूट सुबह पांच बजे से शाम छह बजे तक थी, लेकिन अब इसे नौ बजे से छह बजे कर दिया गया है।
11 जिलों में कर्फ्यू लागू, इंटरनेट बंद
मणिपुर के 16 में से 11 जिलों में कर्फ्यू लागू है, जबकि इंटरनेट सेवाएं निलंबित हैं। एक महीने पहले मणिपुर में मेइती और कुकी समुदाय के लोगों के बीच हुई जातीय हिंसा में 100 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और 310 अन्य घायल हो गए थे। राज्य में शांति बहाल करने के लिए सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है।
मणिपुर में अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में 3 मई को पर्वतीय जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के आयोजन के बाद झड़पें हुई थीं। मणिपुर की 53 प्रतिशत आबादी मेइती समुदाय की है और ये मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं। आदिवासियों यानी नागा और कुकी की आबादी 40 प्रतिशत है और ये पर्वतीय जिलों में रहते हैं।