MiG-21 Retirement: भारतीय वायु सेना सितंबर में पुराने MiG-21 लड़ाकू विमान (Fighter Jet) के अपने चार स्क्वाड्रन में से एक को रिटायर करने के लिए तैयार है। Hindustan Times के मुताबिक, इस मामले से जुड़े लोगों ने शुक्रवार को बताया कि बाकी तीन स्क्वाड्रन को अगले तीन सालो में चरणबद्ध तरीके से रिटायर किया जाएगा।
अधिकारियों ने कहा कि स्क्वाड्रन को चरणबद्ध तरीके से हटाने का 28 जुलाई को बाड़मेर में हुई दुर्घटना से कोई लेनादेना नहीं है। इस घटना में दो लड़ाकू पायलट की जान चली गई थी। हालांकि, वायु सेना की MiG-21 को नए लड़ाकू विमानों के साथ बदलने की योजना पहले से ही है।
इन अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि अगले दो महीने में श्रीनगर स्थित नंबर 51 स्क्वाड्रन रिटायर हो जाएगा। इसे "स्वॉर्ड आर्म्स" के नाम से भी जाना जाता है।
विंग कमांडर (अब ग्रुप कैप्टन) अभिनंदन वर्थमान, जिन्हें 27 फरवरी, 2019 को LoC पर एक हवाई लड़ाई के दौरान एक पाकिस्तानी F-16 को मार गिराने के लिए वीर चक्र से सम्मानित किया गया था, उस समय 51वें स्क्वाड्रन में ही थे। पाकिस्तान के बालाकोट में IAF की तरफ से आतंकी लॉन्चपैड पर बमबारी करने के एक दिन बाद ये डॉगफाइट हुई थी।
MiG-21 भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाला लड़ाकू विमान है। हाल के सालों में कई MiG-21 दुर्घटनाग्रस्त हो गए हैं। इसी के मद्देनजर एयरफोर्स ने पुराने विमानों को नए फाइटर जैट से बदलने की योजना बनाई है।
वायु सेना को 1963 में अपना पहला सिंगल-इंजन MiG-21 मिला था। इसने अपनी युद्ध क्षमता को बढ़ाने के लिए सोवियत मूल के सुपरसोनिक लड़ाकू विमानों के 874 वेरिएंट को शामिल किया। अधिकारियों ने कहा कि पिछले छह दशकों के दौरान 400 से ज्यादा MiG-21 हादसों का शिकार हुए हैं, जिसमें करीब 200 पायलटों की जान जा चुकी है।
अधिकारियों ने कहा कि किसी भी दूसरे लड़ाकू विमान की तुलना में MiG-21 ज्यादा दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं, क्योंकि उन्होंने लंबे समय तक भारतीय वायुसेना में सेवा दी है। वायु सेना को नए लड़ाकू विमानों में हुई देरी के कारण न चाहते हुए भी MiG-21 बेड़े को काफी लंबे समय तक उड़ाना पड़ा।
IAF MiG-21 की जगह अब Tejas लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के अलग-अलग मॉडल को शामिल करेगा।