Molnupiravir: कोरोना के इलाज के लिए एंटीवायरल गोली, जिसके पूरे कोर्स में आ सकता है 3000 रुपए तक का खर्च

देश में लगभग 13 दवा कंपनियां MSD और रिजबैक बायोथेरेप्यूटिक्स की तरफ से विकसित इस दवा को लॉन्च करने की तैयारी में हैं

अपडेटेड Dec 30, 2021 पर 2:58 PM
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DCGI ने एंटीवायरल दवा Molnupiravir को दी मंजूरी (FILE)

देश में जहां कोरोनावायरस (Coronavirus) के खिलाफ कई वैक्सीन को मंजूरी दी गई है। इसी कड़ी में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने हाल ही में Covid-19 के इलाज के लिए एंटीवायरल गोली, मोलनुपिरवीर (Molnupiravir) को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी है। इस बीच इकोनॉमिक टाइम्स ने इस मामले से जुड़े लोगों के हवाले से बताया कि इस दवा का इलाज काफी महंगा पड़ सकता है, ऐसा माना जा रहा है कि इसका पूरा कोर्स करीब दो से तीन हजार रुपए का हो सकता है।

देश में लगभग 13 दवा कंपनियां MSD और रिजबैक बायोथेरेप्यूटिक्स की तरफ से विकसित इस दवा को लॉन्च करने की तैयारी में हैं, लेकिन सभी कंपनियां इसकी कीमतों पर चुप्पी साधे हुए हैं।

मोलनुपिरवीर की दिन में दो बार 800 mg की डोज पांच दिनों तक लेनी होगी। कंपनियां 200 mg के कैप्सूल लॉन्च करने की योजना बना रही हैं, इसलिए एक मरीज को इलाज के दौरान ऐसे 40 कैप्सूल खाने होंगे।

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स्टॉकिस्ट्स ने ET को बताया कि नैटको फार्मा, जेबी केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स (JBCPL), हेटेरो ड्रग्स, मैनकाइंड फार्मा, वियाट्रिस (पहले माइलान) और सन फार्मा, जैसे मोलनुपिराविर कम से कम छह ब्रांड की अगले हफ्ते तक बाजार में आने की उम्मीद है।

पुणे स्थित फार्मास्युटिकल थोक विक्रेता अरिहंत केमिस्ट के MD राजेश जैन ने कहा, "3 जनवरी तक मोलनुपिरवीर के स्टॉक हमारे पास पहुंचने की उम्मीद है।" दवा कंपनियों ने डॉक्टरों को दवा से जुड़े लिटरेचर भेजना शुरू कर दिया है। प्रोटो कंसल्ट के एमडी हरि नटराजन ने कहा, "मोलनुपिरावीर फ़ेविपिरार जैसी ही है, जिसमें दर्जनों कंपनियों ने इसे लॉन्च किया, जिससे कीमतों में गिरावट आई।"

एक हजार मरीजों पर होगा गोली का ट्रायल

मोलनुपिरवीर की सुरक्षा का आकलन करने के लिए 1,000 मरीजों पर इसका ट्रायल किया जाएगा। भारत के ड्रग रेगुलेटर की तरफ से जारी दवा के निर्माण और मार्केटिंग की अनुमति वाले पत्र में कहा गया कि तीन महीने के अंदर क्लीनिकल ट्रायल की अपडेट डिटेल देनी होगी।

इसमें एक शर्त यह भी है कि, पोस्ट मार्केटिंग सर्विलांस के रूप में, कंपनियों को ड्रग रेगुलटर के सामने समय-समय पर सेफ्टी अपडेट रिपोर्ट पेश करनी होगी। इसके अलावा कंपनियों को स्थिरता पर भी स्टडी जारी रखने के लिए कहा गया है।

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