जम्मू-कश्मीर से लेकर पुडुचेरी तक, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पुलिस की वर्दी अलग-अलग है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने पुलिस के लिए 'एक राष्ट्र, एक वर्दी (One Nation, One Uniform)' का विचार रखा है। उन्होंने हरियाणा में राज्यों के गृह मंत्रियों के पहले चिंतन शिविर को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा, 'पुलिस के लिए 'वन नेशन, वन यूनिफॉर्म' सिर्फ एक आइडिया है। मैं इसे आप पर थोपने की कोशिश नहीं कर रहा हूं। बस इसे एक विचार दें। यह 5, 50 या सौ सालों में हो सकता है। लेकिन हमें इसके बारे में विचार करना चाहिए।
मोदी ने कहा कि पुलिस के लिए 'वन नेशन, वन यूनिफॉर्म' होने से न केवल बड़े पैमाने पर अच्छी क्वालिटी वाले उत्पादों को बनाना सुनिश्चित होगा बल्कि पुलिस को एक 'साझा पहचान' भी मिलेगी और लोग उन्हें देश में कहीं भी पहचान सकेंगे।
भारत में अधिकतर पुलिसकर्मी इस समय जो खाकी वर्दी पहनते हैं, उसे अंग्रेजों के समय में शुरू किया गया। हालांकि कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वर्दी के रंग, कपड़े और पैटर्न में आपको थोड़ा बदलाव दिखेगा। PM मोदी के प्रस्ताव के बाद अब एक फिर देश में पुलिस की वर्दी को लेकर मंथन शुरू हो गया है।
इस मौके पर यह समझना जरूरी है कि भारत में पुलिस की वर्दी का इतिहास क्या है? भारत में पुलिस की वर्दी कौन तय करता है? अलग-अलग राज्यों में पुलिस की वर्दी भी अलग-अलग क्यों है? और क्या हाल ही में पुलिस की वर्दी में बदलाव किए गए हैं? आइए इसे जानते हैं-
पुलिस की वर्दी का इतिहास
जब अंग्रेज भारत आए तो उन्होंने पुलिस कर्मियों के लिए सफेद वर्दी शुरू की थी। लेकिन धूल और कीचड़ के कारण यह सफेद वर्दी आसानी से गंदी हो जाती थी। वर्दी को गंदा होने से बचाने के लिए, पुलिस अधिकारियों ने उन्हें कई तरह के रंगों में रंगना शुरू कर दिया। इससे आगे चलकर यह वर्दी एक बहुरंगी पोशाक बन गई।
सन 1847 में ब्रिटिश अधिकारी सर हेनरी लॉरेंस ने पुलिस की वर्दी के लिए खाकी को आधिकारिक रंग के रूप में चुना। हेनरी लॉरेंस ने पाया कि खाकी रंग बहुत गहरा नहीं है और यह धूल या ड्रेस पर लगी गंदगी को भी आसानी से छुपा सकता है। तब से लेकर अब तक देश में पुलिस खाकी रंग की वर्दी पहन रही है।
संविधान के अनुसार, भारत में कानून और व्यवस्था राज्य का विषय है। इसलिए, वर्दी और पुलिस से जुड़े नियम-कानून राज्य सरकारों के अधीन आते हैं। संविधान की सातवीं अनुसूची में केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के विभाजन के बारे में बताया गया है। इसमें 'सार्वजनिक व्यवस्था' और 'पुलिस' को राज्य सूची में डाला गया है। नियम के अनुसार, राज्य सरकारें और यहां तक कि कोई पर्सनल पुलिस फोर्स भी अपने कर्मचारियों की वर्दी के रंग और उसके डिजाइन को लेकर फैसला ले सकती हैं।
किन राज्यों में है अलग यूनिफॉर्म
पुलिस की आधिकारिक ड्रेस अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होती है। अधिकतर राज्यों में पुलिसकर्मी खाकी वर्दी जरूरत पहनते हैं, लेकिन उनके रंगों में थोड़ा अंतर होता है। इसके अलावा कुछ राज्यों में पुलिस अभी भी सफेद यूनिफॉर्म पहनती है।
कोलकाता पुलिस सफेद यूनिफॉर्म पहनती है, लेकिन पश्चिम बंगाल के बाकी पुलिसकर्मी ने खाकी रंग की ड्रेस पहनते हैं। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के जवान सफेद और नीले रंग की वर्दी पहनते हैं। पुडुचेरी पुलिस के सिपाही अपनी खाकी वर्दी के साथ चमकदार लाल टोपी पहनते हैं।
पुलिस की वर्दी में हालिया बदलाव
इसी साल फरवरी में, महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने दरोगा से लेकर डिप्टी एसपी रैंक तक के अधिकारियों के लिए 'ट्यूनिक यूनिफॉर्म' को बंद करने का नोटिस जारी किया था।डीजीपी ने आदेश के कारणों के रूप में ट्यूनिक यूनिफॉर्म के महंगी होने और इससे होने वाली असुविधा का हवाला दिया। पारंपरिक रूप से ब्रिटिश पुलिस अधिकारियों द्वारा पहनी जाने वाली 'ट्यूनिक यूनिफॉर्म' एक तरह का खाकी ओवरकोट होती है, जिसे पुलिसकर्मी पारंपरिक वर्दी के ऊपर पहनते हैं।
ओडिशा सरकार ने इस साल फरवरी में अंग्रेजों के जमाने की ट्यूनिक यूनिफॉर्म और सैम ब्राउन बेल्ट को वर्दी से हटा दिया। ओडिशा के गृह विभाग के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि सैम ब्राउन बेल्ट या क्रॉस बेल्ट अब केवल औपचारिक अवसरों के दौरान पहना जाना है, जब कोई अधिकारी तलवार लेकर चल रहा हो। ओडिशा के गृह विभाग के आदेश के मुताबिक, सैम ब्राउन बेल्ट या क्रॉस बेल्ट अब केवल औपचारिक अवसरों के दौरान पहना जाएगा, जब कोई अधिकारी तलवार लेकर चल रहा हो।
हाल ही में दिल्ली पुलिस ने अपने लिए नई यूनिफॉर्म डिजाइन करने की योजना रखी थी और इसके लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) को जिम्मेदारी दी गई है।
जनवरी 2020 में, महाराष्ट्र पुलिस ने वर्दी के रंग में किसी तरह के अंतर को खत्म करने के लिए खाकी के यूनिवर्सल कलर कोड- PANTONE 18-1022 TCX को आधिकारिक रंग के रूप में मान्यता दी है।