फाइनेंस मिनिस्ट्री ने स्पष्ट किया है कि भारी नुकसान का सामना कर रहे PMC बैंक के कस्टमर्स पर भी डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) एक्ट लागू होगा। हालांकि, नए एक्ट में यह कहा गया है कि किसी बैंक के मोराटोरियम में जाने के 90 दिनों के अंदर 5 लाख रुपये तक का भुगतान किया जाएगा। सरकार ने एक नया सेक्शन भी इसमें शामिल किया है जो कहता है कि उन बैंकों के लिए भी भुगतान लागू होगा जिनके बिजनेस पर पहले से रोक है।
इससे PMC बैंक के डिपॉजिटर्स इसमें शामिल हो जाएंगे। PMC बैंक पर लगभग दो वर्ष पहले रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बंदिशें लगाई थी।
फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण के अनुसार, "यह चिंता का कारण बना हुआ है कि एक बैंक पर RBI की ओर से विभिन्न बंदिशें लगाए जाने पर वास्तविक डिपॉजिटर्स को अपने डिपॉजिट को हासिल करने के लिए डिपॉजिट इंश्योरेंस के बावजूद काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।"
बिल में कहा गया है कि बैंकिंग रेगुलेशंस एक्ट के तहत इंश्योरेंस के तहत आने वाले बैंक के बिजनेस के लिए कोई निर्देश, रोक या स्कीम DICGC एक्ट लागू होने की तिथि पर लागू होने की स्थिति में कॉरपोरेट ऐसे बैंक के प्रत्येक डिपॉजिटर को भुगतान करने की जिम्मेदार होगी।
RBI ने पिछले महीने PMC बैंक पर बंदिशों को इस वर्ष के अंत तक बढ़ा दिया था। इसके तहत बैंक से राशि निकालने की लिमिट 1 लाख रुपये की है।
PMC बैंक में घोटाला सामने आने के बाद कोऑपरेटिव बैंकों की सरकार की ओर से निगरानी को लेकर प्रश्न उठे थे। इस बैंक के कस्टमर्स को पिछले दो वर्षों से परेशानियां उठानी पड़ रही हैं।