महिला आरक्षण बिल को लेकर भूख हड़ताल पर बैठीं BRS नेता कविता, लेकिन उनके तेलंगाना में हैं सिर्फ 2 महिला मंत्री

तेलंगाना कैबिनेट पर नजर डालने से पता चलता है कि कविता का राज्य महिला प्रतिनिधित्व के लिए कोई बड़ा उदाहरण नहीं है। 17 सदस्यीय मंत्रिपरिषद में केवल दो महिलाएं हैं। पहली महिला मंत्री पी सविता इंद्र रेड्डी हैं, जिनके पास शिक्षा विभाग है। जबकि दूसरी महिला मंत्री सत्यवती राठौड़ हैं, जिनके पास एसटी कल्याण और महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय है

अपडेटेड Mar 10, 2023 पर 5:50 PM
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BRS नेता के कविता ने काफी समय से लंबित महिला आरक्षण विधेयक को जल्द पारित करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की है

दिल्ली आबकारी घोटाला (Delhi Excise Scam) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समक्ष पेशी से एक दिन पहले भारत राष्ट्र समिति (BRS) की नेता के कविता (KCR Daughter K Kavitha) ने काफी समय से लंबित महिला आरक्षण विधेयक (Women’s Reservation Bill) को जल्द पारित करने की मांग को लेकर शुक्रवार सुबह छह घंटे की भूख हड़ताल शुरू की। इस दौरान कविता ने कहा कि अगर भारत को विकसित होना है, तो महिलाओं को राजनीति में अहम भूमिका निभानी होगी। इसके लिए पिछले 27 साल से लंबित महिला आरक्षण विधेयक को लाना जरूरी है। यह तो शुरुआत भर है और देशभर में विरोध जारी रहेगा।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता सीताराम येचुरी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल की शुरुआत की। हड़ताल में समाजवादी पार्टी (SP) की नेता सीमा शुक्ला, तेलंगाना की शिक्षा मंत्री सविता इंद्र रेड्डी और राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री सत्यवती राठौर भी शामिल हुईं। ED ने BRS नेता को दिल्ली सरकार की आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में तलब किया है।

वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) के संजय सिंह और चित्रा सरवारा, अकाली दल के नरेश गुजराल, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अंजुम जावेद मिर्जा, नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) की शमी फिरदौस, तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुष्मिता देव, जनता दल यूनाइटेड (JDU) के केसी त्यागी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की सीमा मलिक, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नारायण के, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के श्याम रजक और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की प्रियंका चतुर्वेदी के अलावा कांग्रेस के पूर्व नेता कपिल सिब्बल ने भी हड़ताल में हिस्सा लेने की पुष्टि की है।


तेलंगाना में हैं सिर्फ 2 महिला मंत्री

तेलंगाना कैबिनेट पर नजर डालने से पता चलता है कि कविता का राज्य महिला प्रतिनिधित्व के लिए कोई बड़ा उदाहरण नहीं है। 17 सदस्यीय मंत्रिपरिषद में केवल दो महिलाएं हैं। पहली महिला मंत्री पी सविता इंद्र रेड्डी हैं, जिनके पास शिक्षा विभाग है। जबकि दूसरी महिला मंत्री सत्यवती राठौड़ हैं, जिनके पास एसटी कल्याण और महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय है।

इतना ही नहीं 103 विधायकों में से केवल पांच महिलाएं हैं। जी हां, अजमीरा रेखा, जो खानापुर (एसटी), एम पद्मा देवेंद्र रेड्डी (मेडक), पी सबिता इंद्रा रेड्डी (महेश्वरम), गोंगीदी सुनीता (अलैयर) और हरिप्रिया बनोथ (येल्लांदु) राज्य का प्रतिनिधित्व करती हैं। वहीं, 40 MLC में से कविता सहित केवल तीन महिलाएं हैं।

निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की कमी

तेलंगाना विधायी निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की कमी की बार-बार आलोचना की गई है। जब तेलंगाना राष्ट्र समिति (अब BRS) ने 2018 में पहली बार सरकार बनाई, तो 18 सदस्यीय मंत्रिपरिषद में कोई महिला शामिल नहीं थी। इसके बाद 2018 में जब दोबारा सत्ता में आई तो शुरुआती कैबिनेट में दोबारा कोई महिला नहीं थी। जब एक नव-नियुक्त मंत्री जगदीश रेड्डी से उस समय महिलाओं की अनुपस्थिति के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया, "वे घर पर हैं।"

बाद में सितंबर 2019 में एक कैबिनेट विस्तार में सबिता और सत्यवती को शामिल किया गया। 2014 में पार्टी की गठन के बाद से यह पहली बार था जब कैबिनेट में किसी महिला मंत्री को शामिल गिया। 2019 में उस समय निजामाबाद की सांसद कविता से जब उनके पिता के मंत्रिमंडल में महिलाओं की कमी के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने कहा था कि वह उन्हें अधिक महिलाओं को शामिल करने के लिए प्रभावित नहीं कर सकती हैं।

क्या है महिला बिल?

महिला आरक्षण विधेयक में लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। 12 सितंबर 1996 को सबसे पहले संयुक्त मोर्चा सरकार ने इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया था। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार ने भी इस विधेयक को लोकसभा के पटल पर रखा था, लेकिन यह तब भी पारित नहीं हो सका था।

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मई 2008 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) की पहली सरकार ने एक बार फिर महिला आरक्षण विधेयक पेश किया, जिसे राज्यसभा ने एक स्थाई समिति के पास भेज दिया। 2010 में राज्यसभा ने महिला आरक्षण विधेयक पर मुहर लगा दी, जिसके बाद इसे लोकसभा की मंजूरी के लिए भेजा गया। हालांकि, 15वीं लोकसभा भंग होने की वजह से विधेयक की मियाद खत्म हो गई।

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