झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता पर खतरा मंडराने लगा है। दरअसल, चुनाव आयोग ने राज्यपाल को हेमंत सोरेन की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश भेज दी है। चुनाव आयोग ने लाभ के पद पर होने के आरोपों पर भी अपनी राय भेजी है। BJP सांसद निशिकांत दूबे का दावा है कि चुनाव आयोग ने झारखंड के राज्यपाल को अपनी रिपोर्ट भेज दी है। सीएम हेमंत सोरेन की ओर से रांची के अनगड़ा में पत्थर खनन लीज मामले में BJP नेताओं ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 का उल्लंघन का आरोप लगाया था। इसके साथ ही सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग राज्यपाल से की थी।
जानिए क्या है सीएम सोरेन पर आरोप
हेमंत सोरेन पर झारखंड का सीएम रहते खनन पट्टा खुद को और अपने भाई को जारी करने का आरोप है। उस वक्त हेमंत सोरेन पर खनन मंत्रालय भी था। ED ने हाल ही में खनन सचिव पूजा सिंघल को मनी लॉन्ड्रिंग के केस में गिरफ्तार किया था। पूजा ने ही खनन का लाइसेंस जारी किया था। झारखंड के पूर्व सीएम रघुबर दास ने इस साल फरवरी में दावा किया था कि सोरेन ने अपने पद का दुरुपयोग किया है। उन्होंने खुद को खनन पट्टा जारी किया है। यह एक ऐसा मुद्दा है, जिसमें हितों के टकराव और भ्रष्टाचार दोनों शामिल हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया।
इस विवाद को संज्ञान में लेत हुए चुनाव आयोग ने मई में सोरेन को एक नोटिस भेजकर खनन पट्टे पर उनका पक्ष मांगा था। इस मामले में सीएम हेमंत सोरेन ने अपना पक्ष वकील के जरिए चुनाव आयोग में रखा। हेमंत सोरेन के वकील ने आयोग से कहा कि यह मामला लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 9A के तहत नहीं आता है। चुनाव आयोग ने 18 अगस्त को इस मामले की सुनवाई पूरी कर ली थी। फिलहाल चुनाव आयोग ने अपनी रिपोर्ट राज्यपाल के पास भेज दी है।