दिल्ली मेयर चुनाव (Delhi mayoral poll) को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच जारी खींचतान के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनिया है। सुप्रीम कोर्ट (SC) ने शुक्रवार को साफ कर दिया कि मेयर चुनाव में मनोनीत पार्षद यानी एल्डरमैन वोट नहीं करेंगे। इस फैसले को AAP के लिए बड़ी राहत, तो बीजेपी और दिल्ली के उपराज्यपाल के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा कि मेयर चुनाव के बाद, मेयर ही डिप्टी मेयर और स्टैंडिंग कमेटी का चुनाव कराएंगे और इनमें भी मनोनीत पार्षद वोट नहीं करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने ये भी निर्देश दिया कि अगले 24 घंटे के भीतर मेयर चुनाव के लिए MCD की पहली बैठक (MCD Meeting) बुलाने का नोटिस जारी होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने 'जनतंत्र की जीत' बताया है। फैसला आने के बाद केजरीवाल ने ट्वीट किया, "SC का आदेश जनतंत्र की जीत। SC का बहुत बहुत शुक्रिया। ढाई महीने बाद अब दिल्ली को मेयर मिलेगा।"
उन्होंने आगे लिखा, "ये साबित हो गया कि LG और BJP मिलकर आए दिन दिल्ली में कैसे गैर-कानूनी और असंवैधानिक आदेश पारित कर रहे हैं।"
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा, "मेयर का चुनाव पहले होना है और फिर वह उस बैठक के लिए पीठासीन प्राधिकारी होगा, जहां डिप्टी-मेयर चुना जाता है।"
दिल्ली के मेयर का चुनाव पहले 16 फरवरी को होने वाले थे, लेकिन शीर्ष अदालत की निर्धारित सुनवाई के कारण उसे स्थगित करना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा था कि MCD के मनोनीत सदस्य AAP-BJP की लड़ाई के कारण तीन बार रुके मेयर चुनाव में मतदान नहीं कर सकते हैं।
दरअसल चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने AAP मेयर पद की उम्मीदवार शैली ओबेरॉय की तरफ से मेयर चुनाव जल्द कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की।
दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना के कार्यालय की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) संजय जैन ने कहा कि 16 फरवरी को होने वाला मतदान 17 फरवरी के बाद की तारीख तक स्थगित किया जाएगा।
चीफ जस्टिस ने AAP की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलों का संज्ञान लिया। DMC अधिनियम में चुनाव की प्रक्रिया को पढ़ते हुए, सिंघवी ने कहा, "पहले मेयर का चुनाव होता है, और फिर मेयर दूसरी सभी बैठकों की अध्यक्षता करते हैं।"
ये फैसला ठीक वैसा ही है, जैसा कि सोमवार को CJI ने बयान दिया था। इस बेंच में उनके साथ जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जे बी पारदीवाला भी शामिल थे। उन्होंने कहा था, “मनोनीत सदस्य चुनाव में नहीं जा सकते। संवैधानिक प्रावधान बहुत साफ है।" CJI ने ASG से कहा, "मनोनीत सदस्यों को मतदान नहीं करना चाहिए।