महाराष्ट्र (Maharashtra) में एक बड़ा राजनीतिक फेरबदल हुआ है। करीब आठ महीने से उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के बीच असली शिवसेना (Shiv Sena) को लेकर चली आ रही लड़ाई पर चुनाव आयोग ने अपने फैसले से विराम लगा दिया। EC का ये फैसला उद्धव ठाकरे खेमे के लिए झटका, तो शिंदे खेमे की जीत की तरह देख जा रहा है। क्योंकि आयोग ने एकनाथ शिंदे के धड़े को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दे दी। साथ ही उसे पार्टी का चुनाव चिह्न 'तीर-धनुष' भी दे दिया गया है।
जून में विद्रोह के बाद एकनाथ शिंदे ने BJP के समर्थन से पार्टी के ज्यादातर विधायकों को साथ लेकर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास आघाडी सरकार को गिरा दिया था। इसके बाद से दोनों ही पक्ष असली शिवसेना के दावे को लेकर झगड़ रहे थे।
चुनाव आयोग (EC) ने अपने फैसले में कहा कि शिवसेना का 2018 में संशोधित किया गया संविधान आयोग के रिकॉर्ड में नहीं है। EC ने कहा कि साल 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शिवसेना के 55 जीते हुए उम्मीदवारों में से एकनाथ शिंदे का समर्थन करने वाले विधायकों के पक्ष में लगभग 76 फीसदी वोट पड़े थे।
आयोग ने आगे कहा, "जबकि महाराष्ट्र में 2019 के चुनाव में शिवसेना के जीते हुए 55 उम्मीदवारों के पक्ष में मिले वोट से 23.5 प्रतिशत मत उद्धव ठाकरे धड़े के विधायकों को मिले हैं।"
चुनाव आयोग के फैसले के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, "यह बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा की जीत है। आयोग ने शिंदे धड़े को असली शिवसेना माना।"
मुख्यमंत्री शिंदे ने आगे कहा, "हमने बालासाहेब के विचारों को ध्यान में रखते हुए पिछले साल महाराष्ट्र में BJP के समर्थन से सरकार बनाई थी।"
चुनाव आयोग के फैसले पर उद्धव गुट के नेता संजय राउत ने कहा कि देश में लोकतंत्र बचा ही नहीं है। सब ग़ुलाम बनकर बैठे हैं, ये लोकतंत्र की हत्या है। उन्होंने आगे कहा, "हमें इस तरह के फैसले की उम्मीद थी। चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं है।"
राउत ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "इस सरकार ने करोड़ो रुपए पानी की तरह बहाया है, वो पानी कहां तक पहुंचा है ये दिख रहा है। हमें फिक्र करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि जनता हमारे साथ है। हम नया चिह्न लेकर जाएंगे और फिर एक बार यही शिवसेना खड़ी करके दिखाएंगे।"
वहीं पार्टी पर नियंत्रण के लिए चली लंबी लड़ाई के बाद 78 पेज के अपने आदेश में, चुनाव आयोग ने उद्धव ठाकरे गुट को राज्य में विधानसभा उपचुनावों के पूरा होने तक ‘मशाल’ चुनाव चिह्न रखने की अनुमति दी।