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...जब मध्यप्रदेश के मंत्री बाल कवि बैरागी को एक बच्चे ने कहा, 'ये मिनिस्टर हैं सब खा जाएंगे'

बैरागी जी ने अपने संस्मरण में लिखा है कि कैसे एक बच्चे ने मासूमियत से भारत रत की समूची प्रशासनिक राजनीति की एक ही वाक्य में लोक प्रचलित व्याख्या कर दी

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 28, 2022 पर 7:23 AM
...जब मध्यप्रदेश के मंत्री बाल कवि बैरागी को एक बच्चे ने कहा, 'ये मिनिस्टर हैं सब खा जाएंगे'
मध्य प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री रहे बाल कवि बैरागी के संस्मरण का एक दिलचस्प वाकया

सुरेंद्र किशोर

आज कई बार कुछ मंत्रियों के ऐसे कारनामे सामने आते हैं जिनसे यह सवाल उठने लगता है कि क्या वे इनसान भी हैं या सिर्फ मिनिस्टर? कुछ जानबूझ कर और कुछ मजबूरी में कतिपय मंत्रियों को ऐसे -ऐसे काम करने पड़ते हैं जिनसे उपर्युक्त भेद मिटता नजर आता है। कभी मध्य प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री नंदराम दास बैरागी ऊर्फ बाल कवि बैरागी को तो नाहक ही कभी -कभी आत्म ग्लानी हो जाती थी। नतीजतन संवेदनशील कवि बैरागी को यह कहना पड़ा था, "तब मैं मनुष्य नहीं था,मिनिस्टर था।" देश के किसी अन्य मंत्री ने कभी ऐसा महसूस किया हो,ऐसी खबर नहीं है। यही तो है एक कवि और खांटी नेताओं के बीच का फर्क!

अब निश्चल कवि बाल कवि बैरागी के कुछ संस्मरण पढ़िए। अस्सी के दशक में मध्य प्रदेश में अर्जुन सिंह मंत्रिमंडल के राज्य मंत्री रहे बैरागी ने सन 2006 में बेबाक संस्मरण लिखा था। साल 1931 में जन्मे नंद राम दास बैरागी का 2018 में निधन हो गया। वे बारी -बारी से लोक सभा और राज्य सभा के भी चर्चित सदस्य रहे। वे मध्य प्रदेश में पहले सूचना राज्य मंत्री और बाद में खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के राज्य मंत्री थे। प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की सहमति और इच्छा से उन्हें मंत्री बनाया गया था।

एक मशहूर कवि -लेखक को ऐसा विभाग मिलने पर उनके मित्र उनसे कहा करते थे, "कालीदास के वंशज किरोसिन बेच रहे हैं!" बैरागी जी जब चौथी कक्षा में थे तो उन्होंने एक कविता लिखी थी।

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