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'नौकरियों पर पहला अधिकार कन्नड़ लोगों का है'; प्राइवेट कंपनियों में आरक्षण पर अब कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के बेटे का नया बयान

Kannadiga quota row: कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने निजी क्षेत्र में स्थानीय लोगों के लिए आरक्षण अनिवार्य करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। राज्य मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत इस विधेयक में मैनेजमेंट पदों पर 50 प्रतिशत और गैर-मैनेजमेंट पदों पर 75 फीसदी कन्नड़ लोगों की नियुक्ति का निर्देश दिया गया है। इस निर्णय पर उद्योग जगत की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई है

Akhileshअपडेटेड Jul 18, 2024 पर 5:27 PM
'नौकरियों पर पहला अधिकार कन्नड़ लोगों का है'; प्राइवेट कंपनियों में आरक्षण पर अब कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के बेटे का नया बयान
Kannadiga quota row: कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे का कहना है कि राज्य में नौकरियों पर पहला अधिकार कन्नड़ लोगों का है

Karnataka government puts job reservation bill: कर्नाटक के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे ने कहा कि राज्य में नौकरियों पर पहला अधिकार कन्नड़ लोगों का है। उन्होंने कहा कि प्राइवेट कंपनियों में रिजर्वेशन वाला विधेयक समीक्षा के बाद कुछ दिनों बाद लागू किया जाएगा। बता दें कि कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने निजी क्षेत्र में स्थानीय लोगों के लिए आरक्षण अनिवार्य करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। राज्य मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत इस विधेयक में मैनेजमेंट पदों पर 50 प्रतिशत और गैर-मैनेजमेंट पदों पर 75 फीसदी कन्नड़ लोगों की नियुक्ति का निर्देश दिया गया है। इस निर्णय पर उद्योग जगत की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई है।

प्रियांक खड़गे ने हिंदुस्तानटाइम्स डॉट कॉम को बताया, "वर्तमान में उद्योगों में भ्रम की स्थिति है, यही वजह है कि इस प्रस्ताव को स्थगित कर दिया गया है। हम उनकी आशंकाओं को दूर करने के लिए उनके साथ विचार-विमर्श करेंगे। राज्य के लोगों को नौकरियों पर पहला अधिकार है।" कांग्रेस नेता ने कहा कि निजी क्षेत्र कोटा विधेयक का मसौदा राज्य के श्रम विभाग द्वारा पेश किया गया था। इसे पहले अंतर-मंत्रालयी एडवाइजरी से गुजरना था।

खड़गे ने कहा, "सब कुछ कानून के दायरे में किया जाएगा, अन्यथा इसे चुनौती दी जाएगी। हरियाणा को देखें... इसने भी यही कानून पेश किया था, लेकिन इसे रद्द कर दिया गया। इसलिए, हम ऐसा कुछ भी नहीं चाहते जो गैरकानूनी हो।" बता दें कि 2020 में हरियाणा सरकार ने स्थानीय निवासियों के लिए 30,000 रुपये प्रति माह तक की सैलरी वाली निजी क्षेत्र की 75 प्रतिशत नौकरियों को आरक्षित करने वाला विधेयक पारित किया। इस विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिल गई, लेकिन फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन और अन्य संगठनों ने इसे चुनौती दी।

उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में तर्क दिया कि यह कानून हरियाणा में कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र की नौकरियां कौशल आधारित हैं और कर्मचारियों को देश भर में उपयुक्त पदों के लिए आवेदन करने का अवसर मिलना चाहिए। आखिरकार, अदालत ने फैसला सुनाया कि कोई राज्य इस तथ्य के आधार पर व्यक्तियों के साथ भेदभाव नहीं कर सकता कि वे उस विशेष राज्य से संबंधित नहीं हैं।

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