मोदी कैबिनेट ने बुधवार को एक बहुत बड़ा फैसला लिया, जिसमें 'वन नेशन वन इलेक्शन' यानि एक देश एक चुनाव को मंजूरी दे दी गई। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की ब्रीफिंग करते हुए इसकी पुष्टि की। ब्रीफिंग के दौरान उन्होंने कहा हाई लेवल कमेटी की सिफारिशों को मंजूर कर लिया है। उन्होंने कहा कि 1951 से 1967 तक एक साथ चुनाव होते थे। उन्होंने आगे कहा कि बड़ी संख्या में पार्टियों ने एक साथ चुनाव कराने का समर्थन किया है। हम अगले कुछ महीनों में आम सहमति बनाने की कोशिश करेंगे।
वैष्णव ने कहा कि लॉ कमिशन की 170वीं रिपोर्ट में लोकसभा और विधानसभा चुनाव हर पांच साल में एक साथ कराने की सिफारिश दी थी। साथ ही संसदीय समिति ने भी 2015 में अपनी रिपोर्ट में एक दो चरणों में चुनाव कराए जाने की सिफारिश पेश की थी।
इससे पहले 'वन नेशन वन इलेक्शन' पर हाई लेवल कमेटी की रिपोर्ट बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखी गई। पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता वाले पैनल ने लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले मार्च में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट को कैबिनेट के सामना रखना कानून मंत्रालय के 100 दिन के एजेंडे का हिस्सा था।
कोविंद पैनल की इन सिफारिशों को मोदी कैबिनेट ने दी मंजूरी:
- 'वन नेशन वन इलेक्शन' को दो चरणों में लागू किया जाए। मतलब की लोकसभा से लेकर लोकल बॉडी तक के सभी चुनाव दो चरणों में कराए जाएं।
- पहले चरण में लोकसभा और सभी विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं।
- जबकि दूसरे चरण में आम चुनावों के 100 दिनों के भीतर लोकल बॉडी- पंचायत और म्युनिसिपैलिटी के चुनाव कराए जाएं।
- सभी चुनावों के लिए कॉमन वोटर लिस्ट।
- देशभर में 'वन नेशन वन इलेक्शन' को लेकर एक विस्तृत चर्चा की शुरुआत की जाए।
- एक कार्यान्वयन समूह बनाया जाए।
ऐसी खबर है कि मोदी सरकार इस शीतकालीन सत्र में 'वन नेशन वन इलेक्शन' बिल लेकर आएगी। हालांकि, जब वैष्णव से इसे लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने कुछ भी खुलकर नहीं बताया। उन्होंने कहा कि देश में सभी वर्गों से इसे लेकर पहले वस्तृत चर्चा की जाएगी।