पंजाब कांग्रेस (Punjab Congress) ने रविवार को मणिपुर में जातीय हिंसा (Manipur Violence) और राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को लोकसभा सदस्य के रूप में अयोग्य ठहराए जाने के खिलाफ 'मौन सत्याग्रह' (silent protest) किया। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, विधायक अरुणा चौधरी और पूर्व विधायक नवजोत सिंह सिद्धू और भारत भूषण आशु ने यहां गिल रोड पर अनाज मंडी में आयोजित विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।
प्रदर्शनकारियों ने अपनी बांहों और माथे पर काले बैज पहने हुए थे। उनमें से कई ने "लोकतंत्र बचाओ", "राहुल गांधी डरो मत" और "BJP हटाओ देश बचाओ" लिखी तख्तियां भी ले रखी थीं।
राजा वारिंग ने कहा, "आज हमसे जुड़ने वाले हर एक कार्यकर्ता, नेता और समर्थक ने राहुल गांधी की अयोग्यता की पक्षपातपूर्ण और निरंकुश प्रकृति का विरोध किया है। 'भारत जोड़ो यात्रा' ने यह साबित कर दिया है कि राहुल सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि देश में शांति की उम्मीद रखने वाले और जननेता हैं।"
उन्होंने कहा, "सत्ता में बैठे तानाशाह चाहे कितनी भी उनकी आवाज दबाने की कोशिश करें, हम जानते हैं कि कोई भी ताकत उन्हें या कांग्रेस पार्टी को चुप नहीं करा सकती।"
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए वारिंग ने कहा कि लोकतंत्र की वकालत करने वालों और सत्ता में बैठे लोगों को बेनकाब करने वालों को चुप कराने की गहरी साजिश है।
उन्होंने आगे कहा, "कांग्रेस केंद्र में सत्तारूढ़ सरकार के हाथों अन्याय के हर कृत्य से लड़ना जारी रखेगी। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और हमें यकीन है कि सच्चाई की जीत होगी।"
पंजाब कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि गांधी परिवार ने हमेशा देशवासियों के अधिकारों की रक्षा और संविधान की रक्षा के लिए संसद में सत्तारूढ़ व्यवस्था का विरोध किया है।
उन्होंने कहा कि गांधी BJP की तरफ से सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ हमेशा मुखर रहे हैं और उन्होंने सदन में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, नोटबंदी और महंगाई के खिलाफ निर्भीकता से बात की, जिससे आम आदमी पर बोझ पड़ा है।
वारिंग ने मणिपुर की स्थिति से निपटने के तरीके को लेकर भी केंद्र पर निशाना साधा। धरने से इतर चन्नी ने कहा, "हम अपने वरिष्ठ नेता और AICC के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के पीछे मजबूती से खड़े हैं और BJP सरकार को उन्हें डराने-धमकाने की इजाजत नहीं देंगे।"
पूर्व विधायक नवजोत सिद्धू ने ट्वीट किया, "एक नेता की पहचान उसके पद से नहीं होती, उसके चरित्र, विश्वसनीयता और नेक रास्ते से ही एक नेता की पहचान होती है !! राहुल गांधी भारत के संविधान की भावना के मशाल वाहक हैं। हमारे लोकतंत्र को मुक्त करने की इच्छा के साथ धर्मनिरपेक्षता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं!"
गांधी को 24 मार्च को संसद सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया था, जब गुजरात की एक अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया था और उनकी 'मोदी उपनाम' टिप्पणियों के लिए आपराधिक मानहानि के आरोप में दो साल की कैद की सजा सुनाई थी।
उन्होंने हाल ही में हाई कोर्ट के 7 जुलाई के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसने मानहानि मामले में उनकी सजा पर रोक लगाने की मांग वाली उनकी याचिका खारिज कर दी थी।