राजस्थान: पायलट का 'समर्थक' या फिर कोई 'सेट-अप'? कौन हैं राजेंद्र गुढ़ा, गहलोत सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

राजस्थान: राजेंद्र सिंह गुढ़ा (Rajendra Singh Gudha) झुंझुनू के उदयपुरवाटी निर्वाचन क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी (BSP) के टिकट पर दो बार (2018 विधानसभा चुनाव सहित) जीत चुके हैं। हालांकि गुढ़ा और गहलोत हमेशा से दुश्मन नहीं रहे हैं, क्योंकि 2018-19 में, सीएम ने छह BSP विधायकों को अपने पक्ष में कर लिया था, तब गुढ़ा इन सब में सबसे मुख्य व्यक्ति थे

अपडेटेड Jul 24, 2023 पर 9:37 PM
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राजस्थान: कौन हैं राजेंद्र गुढ़ा, गहलोत सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

कांग्रेस (Congress) से बर्खास्त मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा (Rajendra Singh Gudha) ने आरोप लगाया है कि उन्हें आज राजस्थान विधानसभा (Rajasthan Assembly) से उस समय "मुक्का मारा गया और घसीटा गया" जब वह एक "लाल डायरी" (Red Dairy) पेश करने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने दावा किया था कि इस डायरी में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के अवैध वित्तीय लेनदेन शामिल हैं। गुढ़ा ने विधायक वेद प्रकाश सोलंकी को पछाड़कर गहलोत का मुकाबला किया है। गुढ़ा अब सचिन पायलट (Sachin Pilot) के कट्टर समर्थक हैं, इस तरह उन्हें अनुसूचित जाति और गुर्जरों का समर्थन मिला है।

गुढ़ा झुंझुनू के उदयपुरवाटी निर्वाचन क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी (BSP) के टिकट पर दो बार (2018 विधानसभा चुनाव सहित) जीत चुके हैं।

हालांकि गुढ़ा और गहलोत हमेशा से दुश्मन नहीं रहे हैं, क्योंकि 2018-19 में, सीएम ने छह BSP विधायकों को अपने पक्ष में कर लिया था, तब गुढ़ा इन सब में सबसे मुख्य व्यक्ति थे।


गुढ़ा ये चाहेंगे कि उनके दूसरे पांच सहयोगी हमेशा गहलोत सरकार के साथ खड़े रहेंगे। बदले में, उन्होंने ये सुनिश्चित किया कि उनके लोगों पर उनका दबदबा बना रहे, जिसके लिए वह उन्हें सुविधाएं और लाभ देंगे।

समस्या तब शुरू हुई, जब गुढ़ा को सैनिक कल्याण एवं पंचायती राज राज्य मंत्री बनाया गया। उनके वरिष्ठ मंत्री, रमेश मीना, उन्हें सही ढंग काम नहीं देते थे। दरअसल, गुढ़ा के पास फाइलें कम ही आती थीं, जिससे वह परेशान रहते थे। लेकिन असली झटका तब लगा जब गहलोत ने धीरे-धीरे उन BSP विधायकों पर गुढ़ा की पकड़ तोड़ दी, जिन्होंने गुढ़ा के बजाय सीएम का साथ देना पसंद किया।

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तभी गुढ़ा को एहसास हुआ कि "बहुत हो गया", अब उन्हें बोलना ही होगा। ऐसे में उन्होंने चल रहे विधानसभा सत्र में मणिपुर मुद्दे को लेकर सीएम गहलोत पर निशाना साधा और कहा कि सरकार को राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर बात करने के बजाय आत्म चिंतन करना चाहिए। ये समय नेतृत्व के लिए शर्मिंदगी भरा है। इसलिए शुक्रवार को उन्हें बर्खास्त कर दिया गया।

गुढ़ा ने दावा किया कि सोमवार को जब वह "लाल डायरी" पेश करने की कोशिश कर रहे थे, तो उन्हें विधानसभा में "मुक्का मारा गया और घसीटा गया।"

जब उन्होंने दूसरे बीजेपी विधायकों के साथ सदन में हंगामा किया, तो स्पीकर सीपी जोशी ने कार्यवाही स्थगित कर दी। गुढ़ा ने सोमवार को कहा, “सीएम गहलोत के मुझसे पूछने के बाद, मुझे एक साइट से एक लाल डायरी मिली, जहां ED और इनकम टैक्स के अधिकारी छापेमारी कर रहे थे।”

आज के प्रकरण ने गुढ़ा के खिलाफ कांग्रेस सरकार के शक को और बढ़ा दिया है। पार्टी का मानना है कि राज्य विधानसभा चुनावों से पहले ये एक "सेट-अप", तो वहीं "लाल डायरी" के मामले ने राज्य में विपक्षी BJP को गोला बारूद दिया है।

साथी BSP विधायकों की तरफ से उनका साथ छोड़ने के बाद, गुढ़ा आगामी राजस्थान चुनाव में या तो निर्दलीय या फिर AIMIM से चुनाव लड़ सकते हैं।

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