Get App

Sedition Law: 'देशद्रोह कानून पर किया जाएगा दोबारा विचार', केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी यह मांग

केंद्र ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में राजद्रोह से जुड़े दंडात्मक कानून और इसकी वैधता बरकरार रखने के संविधान बैंच के 1962 के एक फैसले का बचाव किया था

MoneyControl Newsअपडेटेड May 09, 2022 पर 4:54 PM
Sedition Law: 'देशद्रोह कानून पर किया जाएगा दोबारा विचार', केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी यह मांग
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी यह मांग

केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (SC) से कहा कि उसने देशद्रोह कानून (Sedition Law) या भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124A पर दोबारा विचार करने और फिर से जांच करने का फैसला किया है। केंद्र ने अपने हलफनामे में शीर्ष अदालत से कहा कि वह सरकार की इन कोशिशों के नतीजे का इंतजार करे। साथ ही तब तक अदालत में देशद्रोह कानून से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई न करे।

रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र ने अपने हलफनामे में आगे कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिक स्वतंत्रता के संरक्षण, मानवाधिकारों के सम्मान के पक्ष में साफ और सही विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने माना है कि जब भारत अपनी आजादी के 75 सालों का जश्न मना रहा है, तो अब पुराने औपनिवेशिक कानूनों का देश में कोई स्थान नहीं है।

दरअसल केंद्र ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में राजद्रोह से जुड़े दंडात्मक कानून और इसकी वैधता बरकरार रखने के संविधान बैंच के 1962 के एक फैसले का बचाव किया था।

चीफ जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की तीन जजों की बैंच ने 5 मई को कहा था कि वह 10 मई को इसपर सुनवाई करेगी, क्या राजद्रोह से जुड़े औपनिवेशिक युग के दंडात्मक कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी बैंच के पास भेजा जा सकता है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें