शरद पवार: जब इटालियन होने पर सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री बनने का किया था विरोध, कांग्रेस से निकाले जाने के बाद बनाई थी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी
शरद पवार (Sharad Pawar) ने अपनी आत्मकथा, "Lok Majhe Sangaayi - Political Autobiography" के विमोचन के दौरान अपने रिटायरमेंट की घोषणा की। पार्टी कार्यकर्ता को संबोधित करते हुए, पवार ने कहा कि पार्टी की बागडोर कौन संभालेगा और इसे आगे कैसे बढ़ाया जाएगा, ये तय करने के लिए एक समिति बनाई गई है। उनकी इस घोषणा से उनके समर्थकों को बड़ा झटका लगा है
शरद पवार ने जब इटालियन होने पर सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री बनने का किया था विरोध (FILE PHOTO)
'मैं NCP के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहा हूं...' ये ऐलान मंगलवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के संस्थापक और अध्यक्ष शरद पवार (Sharad Pawar) ने भरे मंच से किया, जिसके बाद महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारे में बड़ी हलचल मच गई। उनकी इस घोषणा के बाद से ही NCP का हर बड़ा नेता अपने पार्टी लीडिर को मनाने और उनसे अपना फैसला वापस लेने की मांग करता नजर आ रहा है। चौंकाने वाली बात ये है कि पवार ने अपनी आत्मकथा, "Lok Majhe Sangaayi - Political Autobiography" के विमोचन के दौरान अपने रिटायरमेंट की घोषणा की।
पार्टी कार्यकर्ता को संबोधित करते हुए, पवार ने कहा कि पार्टी की बागडोर कौन संभालेगा और इसे आगे कैसे बढ़ाया जाएगा, ये तय करने के लिए एक समिति बनाई गई है। प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, अजीत पवार, जयंत पाटिल और कुछ अन्य पार्टी के वरिष्ठ नेता समिति का हिस्सा होंगे।
अपनी पत्नी प्रतिभा के साथ 82 साल के पवार ने कहा, "मुझे पता है कि कब रुकना है..मैंने NCP के वरिष्ठ नेताओं की एक समिति बनाई है, जो अगले अध्यक्ष के बारे में फैसला करेगी।"
उनकी इस घोषणा से उनके समर्थकों को बड़ा झटका लगा है। कई लोग फूट-फूट कर रोने लगे और उनके समर्थन में नारे लगाए, कई पार्टी कार्यकर्ताओं ने पवार से अपना फैसला वापस लेने की अपील की और कहा कि देश को उनकी जरूरत है।
इतना ही नहीं पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने मांग की कि पवार अपना फैसला वापस लें। उन्होंने धमकी दी कि जब तक वह अपना फैसला वापस नहीं लेंगे, वे कार्यक्रम स्थल से बाहर नहीं जाएंगे।
बेशक, ये सब देखकर शरद पवार को अच्छा लगा होगा कि आखिरकार उनके समर्थक और उनकी पार्टी नेता उन्हें कितना चाहते हैं, मगर उनके मन में कहीं न कहीं ये दुख जरूर होगा कि वे प्रधानमंत्री नहीं बन पाए। हालांकि, भारतीय राजनीति में शरद पवार अकेले नेता नहीं हैं, जो इस पद की चाह करते रहे, लेकिन उस तक कभी पहुंच नहीं पाए।
पवार के मामले में ये बात कुछ अलग इसलिए भी है, क्योंकि एक समय उन्होंने कांग्रेस में रहते हुए ही अपनी पार्टी अध्यक्ष के प्रधानमंत्री बनने का खुल कर विरोध किया था और इसके लिए उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था। आज एक बार फिर वही किस्सा हम आपको बताते हैं कि आखिर कैसे शरद पवार बागी बने और उन्होंने अपनी नई पार्टी NCP को खड़ा किया।
दरअसल 1998 में सोनिया गांधी पहली बार कांग्रेस अध्यक्ष बनीं, लेकिन जब पार्टी के कई लोगों को लगा कि गांधी परिवार का कोई सदस्य सही मायने में पार्टी का जिम्मा संभालने के लिए तैयार है, तो परेशानी शुरू हो गई।
इसके अगले साल ही शरद पवार, पीए संगमा और तारिक अनवर ने खुला विद्रोह कर दिया। उन्होंने महसूस किया कि इटली में जन्मी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की विधवा अपने विदेशी मूल और सीमित राजनीतिक अनुभव के कारण देश को चलाने के लायक नहीं थी। इस विरोध के चलते ही तीनों को पार्टी से निकाल दिया गया।
ये सब तब शुरू हुआ, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 17 अप्रैल, 1999 को लोकसभा में विश्वास मत हार गए। इसके बाद तत्कालीन नवनियुक्त कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी ने केंद्र में सरकार बनाने का दावा पेश किया।
गांधी ने तत्कालीन राष्ट्रपति के.आर. नारायणन से मुलाकात के बाद राष्ट्रपति भवन में मीडिया से कहा था, "हमारे पास 272 हैं और हम और ज्यादा हासिल करने की उम्मीद करते हैं... हमें विश्वास है कि हम और ज्यादा समर्थन हासिल कर लेंगे।"
मगर सोनिया को शायद ये उम्मीद नहीं थी कि उनकी ही पार्टी में उनके इटालियन मूल को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं। लगभग एक महीने बाद, लोकसभा में कांग्रेस के तत्कालीन नेता शरद पवार ने सोनिया के विदेशी मूल का मामला उठाया। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे के कारण कांग्रेस बीजेपी का मुकाबला नहीं कर पाएगी, जो पहले से ही इसे चुनावी मुद्दा बना रही थी।
15 मई, 1999 को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में कांग्रेस में ये विद्रोह खुलकर सामने आया। तब संसद के पूर्व अध्यक्ष पीए संगमा, वरिष्ठ नेता तारिक अनवर और शरद पवार ने सोनिया गांधी को संयुक्त रूप से एक पत्र लिखा।
इस पत्र में उन्होंने कहा, "ये संभव नहीं है कि शिक्षा, सक्षमता और क्षमता के धनी 98 करोड़ की आबादी वाले देश में भारत की धरती पर जन्म लेने वाले भारतीय के अलावा कोई और उसकी सरकार चला सके।"
इस पत्र के बाद तीनों बागी नेताओं को पार्टी से निकाल दिया गया। इसी साल शरद पवार ने कांग्रेस से अलग होकर अपनी एक नई पार्टी- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) बनाई।
पवार की बगावत से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। इसने लोकसभा में भेजे गए 48 प्रतिनिधियों के मामले में दूसरे सबसे बड़े राज्य महाराष्ट्र में कांग्रेस की उम्मीदों को तोड़ दिया। 1998 में कांग्रेस ने महाराष्ट्र में 33 सीटें जीती थीं।
'मैं या मनमोहन सिंह थे पद के सही उम्मीदवार'
इस घटना के करीब 19 साल बाद शरद पवार ने ये खुलासा किया कि आखिर उन्होंने सोनिया गांधी का विरोध क्यों किया था। पवार ने साल 2018 में पुणे में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे के साथ एक पब्लिक इंटरव्यू में अपने मन की बात कही।
पवार ने कहा कि इस पद के सही दावेदार या तो मनमोहन सिंह थे या खुद पवार। 1999 में हुए घटनाक्रम को याद करते हुए पवार ने कहा कि उन्हें सोनिया गांधी के सरकार बनाने के दावे के बारे में मीडिया की खबरों से पता चला था।
उन्होंने कहा, "मनमोहन सिंह या मैं उस पद (प्रधानमंत्री के) के लिए सही दावेदार थे। मैं घर पर था, जब मुझे मीडिया की खबरों से पता चला कि कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार बनाने का दावा पेश किया है। यही वो क्षण था, जब मैंने कांग्रेस छोड़ने का फैसला कर लिया था।"
शरद पवार ने हालांकि, तब ये भी माना था कि केवल कांग्रेस ही BJP का विकल्प हो सकती है।
इस इंटरव्यू के एक साल बाद ही, 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद महा विकास अघडी (MVA) सरकार बनाने के लिए NCP, कांग्रेस और वैचारिक रूप से एकदम अलग शिवसेना को एक साथ लाने में भी पवार ने ही अहम भूमिका निभाई थी।
शरद पवार चार बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उन्होंने केंद्रीय रक्षा और कृषि मंत्री के रूप में भी काम किया है। पिछले दिनों आने वाले लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी एकजुटता को बढ़ाने के लिए भी पवार काफी एक्टिव रहे हैं।