भीमा कोरेगांव केस: सुप्रीम कोर्ट ने सुधा भारद्वाज की जमानत को चुनौती देने वाली NIA की यचिका खारिज की

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुधा भारद्वाज को एक दिसंबर को जमानत दी थी

अपडेटेड Dec 07, 2021 पर 3:27 PM
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सुप्रीम कोर्ट से सुधा भारद्वाज को बड़ी राहत

सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने 2018 भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में वकील और सामाजिक कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज (Sudha Bharadwaj) को डिफॉल्ट जमानत को चुनौती देने वाली राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत बरकरार रखी है, इसके साथ ही 8 दिसंबर को सुधा का जमानत पर रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुधा भारद्वाज को एक दिसंबर को जमानत दी थी।

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NIA की याचिकता में बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay high court) के आदेश को चुनौती दी गई थी और हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग की गई थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि इस मामले में दखल देने की कोई वजह दिखाई नहीं देती, लिहाजा याचिका खारिज की जाती है।


अगस्त 2018 में गिया गया था गिरफ्तार

भारद्वाज को UAPA के प्रावधानों के तहत अगस्त 2018 में एल्गार परिषद-माओवादी संबंधों के मामले में गिरफ्तार किया गया था। हाई कोर्ट ने एक दिसंबर को अपने आदेश में कहा था कि केंद्र सरकार को अपदस्थ करने के षड्यंत्र में हिस्सा रही भारद्वाज जमानत की हकदार हैं और जमानत देने से इंकार करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के उनके मूल अधिकारों का हनन है।

कल हो सकती है रिहाई

हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था कि भायखला महिला जेल में बंद भारद्वाज को आठ दिसंबर को मुंबई की विशेष एनआईए अदालत में पेश किया जाए और उनकी जमानत की शर्तों एवं रिहाई की तारीख पर निर्णय किया जाए। भारद्वाज उन 16 गिरफ्तार कार्यकर्ताओं एवं शिक्षाविदों में शामिल हैं जिन्हें जमानत मिली है।

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स्टैन स्वामी की इस साल पांच जुलाई को एक निजी अस्पताल में चिकित्सा जमानत का इंतजार करते हुए मौत हो गई थी जबकि अन्य सभी विचाराधीन कैदी के तौर पर हिरासत में हैं। हाई कोर्ट ने मामले में आठ अन्य सह- आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे के शनिवारवाड़ा में एल्गार परिषद के कार्यक्रम में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने से जुड़ा है। पुलिस का दावा है कि भड़काऊ बयानों के कारण इसके अगले दिन पुणे के बाहरी इलाके कोरेगांव-भीमा में हिंसा भड़की। पुलिस का यह भी दावा है कि इस कार्यक्रम को माओवादियों का समर्थन हासिल था। बाद में इस मामले की जांच एनआईए को सौंप दी गई थी।

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