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UP Assembly Elections: उत्तर प्रदेश में BJP की राह पश्चिम से ज्यादा पूरब में कठिन है, जानिए क्या है इसकी वजह

पूर्वांचल एक्सप्रेस वे हो या प्रयागराज से काशी का हाईवे-रेलवे हो या फिर हवाई यात्रा- पूरब की यात्रा भाजपा ने हर किसी के लिए आसान की है, लेकिन क्या भाजपा के लिए पूरब की राजनीतिक यात्रा भी उतनी आसान हो पाएगी

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 06, 2022 पर 1:07 PM
UP Assembly Elections: उत्तर प्रदेश में BJP की राह पश्चिम से ज्यादा पूरब में कठिन है, जानिए क्या है इसकी वजह
उत्तर प्रदेश में पहले और दूसरे चरण के चुनाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश से शुरू हो रहे हैं।सबकी नज़रें पहले और दूसरे चरण के मतदान पर हैं क्योंकि, इसी से पूरे प्रदेश का माहौल बनेगा, ऐसा माना जा रहा है

हर्ष वर्धन त्रिपाठी

UP Assembly Elections: उत्तर प्रदेश में पहले और दूसरे चरण के चुनाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश से शुरू हो रहे हैं। सबकी नज़रें पहले और दूसरे चरण के मतदान पर हैं क्योंकि, इसी से पूरे प्रदेश का माहौल बनेगा, ऐसा माना जा रहा है। पहले-दूसरे चरण के मतदान वाली विधानसभा सीटों पर मुसलमान मतदाताओं की संख्या बहुत अधिक होने और अखिलेश यादव के साथ जयंत चौधरी के आने से यह प्रश्न बड़ा होता जा रहा है कि, भारतीय जनता पार्टी की मुश्किल कितनी बढ़ेगी। यही वजह है कि, स्वयं अमित शाह ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मोर्चा संभाल लिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 31 जनवरी से वर्चुअल रैली के बाद अब 7 फ़रवरी को बिजनौर में पहली सभा करने जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी पूरी ताक़त लगा दी है। यह सब इसके बावजूद है कि, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने टिकट बहुत सलीके से बाँटा है। जहां ख़राब रिपोर्टी मिली, बिना हिचके विधायकों के टिकट काटे, लेकिन पूरब में भारतीय जनता पार्टी ऐसा कर पाती नहीं दिख रही है। जिन विधायकों के प्रति जनता में और विशेषकर भाजपा के कार्यकर्ताओं में आक्रोश है, उनका टिकट भी भारतीय जनता पार्टी नहीं काट पाई है।

और, प्रयागराज की उत्तरी विधानसभा जैसी सीटें हैं, जहां समय से प्रत्याशी नहीं घोषित कर पाई है। जौनपुर में दूसरे दलों से आकर जीते प्रत्याशियों के ख़िलाफ़ माहौल होने के बावजूद उनका टिकट नहीं काट पाई। जौनपुर, मऊ, आज़मगढ़ और ग़ाज़ीपुर में ओमप्रकाश राजभर का भी प्रभाव कई विधानसभा क्षेत्रों में है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के लिए पश्चिम से अधिक मुश्किल राह पूरब में दिख रही है। टिकट बँटवारे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ना के बराबर चली है।

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