Wheat Export : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गरीबों को महंगाई की मार से बचाने के लिए उनके मूल भोजन यानी गेहू की कीमतों को काबू में रखना पहली प्राथमिकता होगी। यह इसलिए भी ज्यादा अहम है, क्योंकि इस साल के अंत तक कई राज्यों में चुनाव होने हैं और इसके साथ ही 2024 में लोकसभा चुनाव होने जा रहे हैं। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार गेहूं के निर्यात पर रोक को जारी रख सकती है, जो देश की 1.4 अरब की आबादी की खुराक का अहम हिस्सा है और यह फूड सिक्योरिटी (food security) का जरूरी हिस्सा है।
2017 के बाद के निचले स्तर पर गेहूं का स्टॉक
सरकार का गेहूं का स्टॉक गरीबों के फूड प्रोग्राम के लिए सप्लाई में इस्तेमाल होता है। यह भंडार इस समय साल 2017 के बाद के निचले स्तर पर आ गया है, जिससे पता चलता है कि प्रधानमंत्री निर्यात पर रोक को हटाने का जोखिम नहीं लेंगे। एक्सपोर्ट पर रोक जारी रहने से वैश्विक स्तर पर गेहूं की कीमतों में तेजी आ सकती है। उधर, अमेरिका के उत्पादक क्षेत्रों में गर्मी और रूस के हमले के बाद यूक्रेन से सप्लाई में गिरावट का भी असर कीमतों पर दिख सकता है।
मार्च में तापमान से तय होगी गेहूं की पैदावार
वहीं, भले ही कृषि मंत्रालय और कुछ ट्रेडर्स को उम्मीद है कि इस साल देश का गेहूं उत्पादन रिकॉर्ड 11.2 करोड़ टन तक पहुंच जाएगा, लेकिन अभी भी यह कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि अभी फसल के वास्तविक आंकड़े सामने आने में समय है। आईटीसी एग्री बिजनेस के डिवीजनल चीफ एक्जीक्यूटिव रजनीकांत राय ने कहा कि अगर प्रमुख उत्तरी उत्पादक क्षेत्रों में तापमान मार्च के अंत तक अप्रत्याशित रूप से चढ़ता है, तो पैदावार पर जोखिम बढ़ सकता है।
अभी तक अच्छी दिख रही है फसल
राय ने कहा, “फसल अभी तक अच्छी दिख रही है, लेकिन हमें तापमान पर नजर रखनी होगी। कम स्टॉक के कारण निर्यात पर प्रतिबंध हटने की संभावना नहीं है।” उन्होंने कहा कि अगर प्रतिबंध हटता है तो घरेलू मार्केट को बूस्ट मिलेगा और वेलफेयर प्रोग्राम के लिए सरकार को मिनिमम सपोर्ट प्राइस पर गेहूं खरीदना मुश्किल हो सकता है।