उत्तर प्रदेश में अब नए मदरसों को किसी तरह का सरकारी अनुदान नहीं दिया जाएगा। योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली यूपी सरकार ने इस संबंध में प्रस्ताव पारित करते हुए अखिलेश सरकार की पुरानी नीति को खत्म कर दिया है। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को पास कर दिया है। अब कोर्ट जाने पर भी मदरसों को कोई राहत नहीं मिलेगी।
यह निर्णय मंगलवार को हुई योगी कैबिनेट की बैठक में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से लाए गए प्रस्ताव पर लिया गया। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, 17 मई को कैबिनेट के फैसले में यूपी सरकार ने मदरसों को अनुदान सूची से बाहर करने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।
560 मदरसों को मिल रहा था अनुदान
यूपी में कुल 16,000 से अधिक रजिस्टर्ड मदरसे हैं। इनमें से 560 मदरसों को इस समय सरकारी अनुदान दिया जा रहा है। इस सरकारी अनुदान से इन मदरसों के टीचर और अन्य कर्मचारियों को सैलरी दी जाती है।
मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने इस प्रस्ताव को पास किया कि आगे से किसी भी नए मदरसे को अनुदान नहीं मिलेगा। हालांकि, पिछले साल भी योगी सरकार की ओर से किसी नए मदरसे को अनुदान नहीं दिया गया था।
अखिलेश सरकार ने शुरू की थी योजना
अखिलेश यादव की अगुवाई वाली सपा सरकार के कार्यकाल में साल 2003 तक के मान्यता प्राप्त 146 मदरसों को अनुदान सूची में शामिल करने का निर्णय हुआ था। उसके बाद 100 मदरसे अनुदान सूची पर ले भी लिए गए थे।
वहीं, बाकी के बचे 46 मदरसों को अनुदान सूची पर लेने से पहले ही सरकार में अर्न्तकलह शुरू हो गई थी, उसके बाद कुछ मदरसों ने अदालत की शरण ले ली थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक मदरसे को अनुदान सूची में शामिल भी किया गया। हालांकि, अब योगी कैबिनेट ने पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार के फैसले को पलट दिया है।