Sheena Bora Murder Case: सुप्रीम कोर्ट ने इंद्राणी मुखर्जी (Indrani Mukerjea) को उनकी बेटी शीना बोरा की हत्या के मामले में जमानत दे दी है। मेडिकल आधार पर कई बार जमानत हासिल करने में नाकामी के बाद मुखर्जी ने एक अन्य याचिका दायर कर मामले के 'गुण-दोष' के आधार पर जमानत मांगी थी। आपको बता दें कि साल 2012 में शीना बोरा लापता हो गई थी और बाद में उसकी लाश मिली थी।
शीर्ष अदालत ने 6 साल से अधिक समय जेल में रहने के आधार पर जमानत का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए कहा कि हम मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी करना पसंद नहीं करते हैं। हालांकि, इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए जमानत दे रहे हैं कि वह साढ़े 6 साल से जेल में है और मुकदमा जल्द खत्म नहीं होगा।
कोर्ट ने कहा कि इंद्राणी साढ़े 6 साल पहले ही जेल में बीता चुकी हैं, जबकि सह आरोपी जमानत पर बाहर है। यह मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। इंद्राणी मुखर्जी अपनी ही बेटी शीना बोरा हत्याकांड की मुख्य आरोपी है।
पीटर मुखर्जी को पहले ही मिल चुकी है जमानत
अदालत ने यह भी नोट किया कि मामले के अन्य आरोपी पीटर मुखर्जी पहले से ही फरवरी 2020 से जमानत पर हैं। अदालत ने इंद्राणी को उन सभी शर्तों के अधीन जमानत पर रिहा करने की अनुमति दी, जिन पर पीटर मुखर्जी को जमानत दी गई थी।
बेटी की हत्या के आरोप में 2015 में किया गया था गिरफ्तार
मुखर्जी को उनके ड्राइवर द्वारा किए गए खुलासे के बाद 2015 में गिरफ्तार किया गया था। 10 साल पहले 2012 में शीना बोरा की हत्या की गई थी। इस हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। CBI अदालत द्वारा कई बार जमानत खारिज होने के बाद इंद्राणी मुखर्जी ने फरवरी में अपनी जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी।
आरोप है कि 2012 में इंद्राणी मुखर्जी ने अपने पति पीटर मुखर्जी एवं पूर्व पति संजीव खन्ना के साथ मिलकर अपनी बेटी शीना बोरा की हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड का खुलासा तीन साल बाद 2015 में हुआ था। एक अन्य मामले में इंद्राणी के ड्राइवर की गिरफ्तारी के बाद इस हत्याकांड का खुलासा हुआ था। पुलिस ने इंद्राणी, पीटर और संजीव को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था।