Ram Mandir: अगर ये IAS अधिकारी नहीं होता तो आज भी नहीं बन पाता राम मंदिर, नेहरू से ले लिया था पंगा

Ram Mandir: केके नायर ने तब देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित गोविंद वल्लभ पंत की बात मान ली होती या बात न मानने के एवज में इस्तीफा दे दिया होता तो शायद आज भी अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर नहीं बन पाया होता

अपडेटेड Jan 12, 2024 पर 12:23 PM
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Ram Mandir Inauguration: जब फैजाबाद के DM केके नायर ने नहीं माना था प्रधानमंत्री का आदेश

Ram Mandir consecration Ceremony: अयोध्या में भव्य राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा में सिर्फ 11 दिन बच गए हैं। राम मंदिर उद्घाटन की तैयारियां जोरों पर है। अयोध्या में 22 जनवरी को रामलला की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा होनी है। इस उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य यजमान के रूप में शामिल होंगे। ऐसे में केंद्र से लेकर यूपी सरकार के आला अधिकारी कार्यक्रम की तैयारियों में व्यस्त हैं। अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा से एक हफ्ते पहले 16 जनवरी से धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे। प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में देश के VVIP से लेकर राम मंदिर आंदोलन में अपनी जान गंवाने वालों को भी को न्योते भेजे जा रहे हैं।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, विश्व हिंदू परिषद (VHP) और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के पदाधिकारियों ने बेहद सधे अंदाज में अतिथियों की लिस्ट तैयार की है। इन मेहमानों की लिस्ट में करीब 150 समुदायों से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है। इन सभी के पास अब धीरे-धीरे न्योते मिलने की पुष्टि होने लगी है।

कौन थे केके नायर जिन्‍होंने राम मंदिर के लिए पीएम से ले लिया पंगा?


राम मंदिर का संघर्ष काफी पुराना है। इससे जुड़े कई कहानी-किस्‍से हैं। इन्‍हीं में से एक ऐतिहासिक कहानी है केके नायर की...। फैजाबाद जिले के डीएम रह चुके IAS अधिकारी केके नायर की राम मंदिर संघर्ष की लड़ाई में अहम योगदान रहा है। उनके रहते आजादी के कुछ समय बाद ही विवादित बाबरी ढांचे में रातों-रात राललला की मूर्तियां रख दी गई थीं। उन्‍होंने तत्‍कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के आदेश की अनदेखी करते हुए भगवान राम की मूर्तियों को विवादित स्‍थल से हटवाने से भी इनकार कर दिया था।

केके नायर ने तब देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित गोविंद वल्लभ पंत की बात मान ली होती या बात न मानने के एवज में इस्तीफा दे दिया होता तो शायद आज भी अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर नहीं बन पाया होता। उस बहादुर IAS अधिकारी का नाम आज अमर हो गया है, जो साल 1949 में अयोध्या के जिलाधिकारी हुआ करते थे। उनके एक इनकार ने 74 साल पहले ही राम मदिर की नींव रख दी थी।

नेहरू की बात मानने से किया इनकार

दरअसल, 22 और 23 दिसंबर 1949 की आधी रात बाबरी ढांचे में कथित तौर पर गुपचुप तरीके से रामलला की मूर्तियां रख दी गईं। इसके बाद अयोध्या में हंगामा मच गया कि राम जन्मभूमि में भगवान प्रकट हुए हैं। लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, मौके पर तैनात पुलिस कांस्टेबल माता प्रसाद ने बताया कि 50 से 60 लोग परिसर का ताला तोड़कर अंदर घुस गए। इसके बाद उन्‍होंने वहां श्रीराम की मूर्ति स्थापित कर दी। मामले में FIR दर्ज करवाई गई थी कि कुछ लोगों ने राम चबूतरे पर बने मंदिर का ताला तोड़कर मूर्ति उठा ली और मस्जिद में रख दी।

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विवादित स्थल पर रखी गईं रामलला की मूर्तियों को हटवाने के लिए तत्‍कालीन पीएम जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें दो बार आदेश दिया। लेकिन केके नायर ने दोनों बार उनके आदेश का पालन करने में असमर्थता जताते हुए इनकार कर दिया। इससे उनकी छवि हिंदूवादी अधिकारी के तौर पर बन गई। बाद में इसका उन्‍हें फायदा मिला। वह और उनकी पत्‍नी ने बाद में लोकसभा चुनाव लड़े और शानदार जीत हासिल की। इतना ही नहीं। उनकी हिंदूवादी छवि का फायदा उनके ड्राइवर तक को मिलाय़ उनके ड्राइवर ने यूपी विधानसभा चुनाव में जीतकर विधायक बना।

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