रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) को पिछले वित्त वर्ष के दौरान मासिक सैलरी 2.5 लाख रुपए मिली थी। पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल (Urjit Patel) को भी अपने कार्यकाल के दौरान इतनी ही सैलरी मिली थी। केंद्रीय बैंक ने Moneycontrol की सूचना के अधिकार (RTI) के जवाब में ये जानकारी दी है।
RTI के जवाब के अनुसार, RBI के एमडी पात्रा, एम राजेश्वर राव, एमके जैन, टी रबी शंकर समेत RBI के चार डिप्टी गवर्नरों को मार्च के अंत तक हर महीने 2.25 लाख रुपये सैलरी मिली है।
RTI के जवाब से पता चलता है कि अनिल कुमार शर्मा, शिरीष चंद्र मुर्मू, ओम प्रकाश मॉल और मृदुल कुमार सागर सहित RBI के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स को फिस्कल ईयर 2022 के आखिर तक मासिक बेसिक सैलरी 2.16 लाख रुपए मिली।
भारत के केंद्रीय बैंक में टॉप मैनेजमेंट की सैलरी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के चेयरमैन दिनेश खारा या बैंक ऑफ बड़ौदा के MD और CEO संजीव चड्ढा की सैलरी के बराबर ही है।
फिस्कल ईयर 2022 में चड्ढा को 38.19 लाख रुपए की सालाना सैलरी के साथ 2,27,191 रुपए के दूसरे फायदे मिले। वहीं खारा को 27 लाख रुपए के बेसिक पे और 742,500 रुपए का महंगाई भत्ता मिला।
2016 से नहीं बढ़ी PSU बैंकों और RBI के प्रमुखों की सैलरी
कंसोलिडेट बेसिस पर, पंजाब नेशनल बैंक (PNB) को छोड़कर फिस्कल ईयर 2022 में पब्लिक सेक्टर के टॉप 5 बैंक लीडर्स की सैलरी 34 लाख रुपए से 40 लाख रुपए के बीच थी।
HDFC के MD और CEO केकी मिस्त्री ने वित्तीय वर्ष 2022 में 19 करोड़ रुपए का ग्रॉस पैकेज लिया।
इसके अलावा PSU बैंकों और RBI के प्रमुखों की सैलरी 2016 से स्थिर रही है। वहीं भारत की कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन (CPI) 2016 में 4.9 प्रतिशत से बढ़कर जून में 7.01 प्रतिशत हो गई।
बैंकों की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, कुल मिलाकर, ICICI बैंक को छोड़कर, टॉप 5 प्राइवेट बैंकों के लीडर्स की सैलरी वित्त वर्ष 2011 में 2.3 करोड़ से 7.1 करोड़ रुपए प्रति वर्ष के बीच थी।
यह पूछे जाने पर कि पिछले वित्त वर्ष के दौरान PSU बैंक प्रमुखों को इक्विटी स्टॉक ऑप्शंस (ESOP) या दूसरे परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव क्यों नहीं मिले? RBI ने कहा कि मांगी गई जानकारी रेगुलटर के पास उपलब्ध नहीं थी।
यह पूछे जाने पर कि प्राइवेट बैंकों की तुलना में PSU बैंक प्रमुखों की सालाना सैलरी इतनी कम क्यों है? RBI ने कहा: "जो जानकारी मांगी जा रही है, वह एक राय है न कि "सूचना" जैसा कि RTI अधिनियम, 2005 की धारा 2 (F) के तहत दिया गया है।"
इसके अलावा, RBI के पास यह भी जानकारी नहीं है कि PSU बैंक प्रमुखों के लिए सालाना टारगेट क्या हैं और उनका परफॉर्मेंस कैसा रहा।