RIP Bibek Debroy: दिग्गज अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री की इकॉनमिक एडवायरी काउंसिल के चेयरमैन बिबेक देबरॉय का निधन हो गया। न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक आज 1 नवंबर को 69 वर्ष की उम्र में उन्होंने अलविदा कहा। पीएम मोदी ने उनके निधन पर शोक जताया है। उन्होंने X (पूर्व नाम Twitter) पर ट्वीट किया कि बिबेक देबरॉय ने इंटेलेक्चुअल लैंडस्केप पर अमिट छाप छोड़ी है जिनकी अर्थशास्त्र, इतिहास, संस्कृति, राजनीति, आध्यात्मिकता के साथ-साथ अन्य कई क्षेत्रों में महारत हासिल थी। पीएम मोदी ने आगे लिखा है कि बिबेक देबरॉय ने पब्लिक पॉलिसी पर काम करने के अलावा प्राचीन ग्रंथों पर भी काम किया है जिससे युवाओं के लिए भी ये आसानी से उपलब्ध हुए।
बिबेक देबरॉय के निधन पर पीएम मोदी समेत कई राजनीतिक नेताओं और अन्य लोगों ने शोक जताया है। पत्रकार और लेखक राहुल पंडिता ने बिबेक देबरॉय की मौत पर शोक जताया। उन्होंने कहा कि एक अद्भुत विद्वान थे, जो अपना ज्ञान लोगों से साझा करते थे। राहुल पंडिता ने कहा कि उन्होंने कुछ सप्ताह पहले बिबेक से मुलाकात थी और इस दौरान उन्होंने पुराणों पर नया काम शुरू करने को लेकर काफी उत्साह दिखाया था।
गरीबी की नई परिभाषा के पैरोकार थे बिबेक देबरॉय
प्रधानमंत्री की इकॉनमिक एडवायरी काउंसिल के चेयरमैन बिबेक देबरॉय नीति आयोग के सदस्य थे और 2007 से सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च में प्रोफेसर रहे। वह कलकत्ता के प्रेसिडेंसी कॉलेज, दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स और ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज के पूर्व छात्र थे। इस साल की शुरुआत में मनीकंट्रोल के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने गरीबी के नए पैमानी की जरूरत पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि तेंदुलकर समिति ने जो पैमाना दिया था, वह 10 साल से अधिक पुराना हो चुका है। बिबेक देबरॉय एक लेखक भी थे। उन्होंने महाभारत, रामायण और भगवद्गीता का संस्कृत से अंग्रेजी में अनुवाद किया। इसके अलावा 'भारत' और 'भारतीय' होने के अर्थ को लेकर एक शो "इतिहास" की मेज़बानी भी की। उन्होंने कई पुराणों की किताबों का भी अंग्रेजी में अनुवाद किया।