SC on Demolition: आपको भी आया है घर या दुकान तोड़ने का नोटिस? तो पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की नई गाइडलाइंस, बड़ी काम आएगी

SC on Bulldozer Action: जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि लोगों के घर सिर्फ इसलिए ध्वस्त कर दिए जाएं कि वे आरोपी या दोषी हैं, तो यह पूरी तरह असंवैधानिक होगा। न्यायमूर्ति गवई ने फैसला सुनाते हुए कहा कि महिलाएं और बच्चे रातभर सकड़ों पर रहें, यह अच्छी बात नहीं है

अपडेटेड Nov 13, 2024 पर 1:56 PM
Story continues below Advertisement
SC on Demolition: अगर आपको भी आया है घर या दुकान तोड़ने का नोटिस, तो पढ़े सुप्रीम कोर्ट नई गाइडलाइंस

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों की ओर से किए जा रहे बुलडोजर एक्शन की कड़ी आलोचना की और कहा कि कार्यपालिका किसी आरोपी की संपत्ति को ध्वस्त करने का निर्देश देकर जजों की तरह काम नहीं कर सकती है। अदालत ने फैसला सुनाया कि उल्लंघन के मामले में, संबंधित अधिकारी नुकसान के अलावा, व्यक्तिगत लागत पर संपत्ति की भरपाई के लिए जिम्मेदार होंगे। शीर्ष अदालत ने संपत्तियों को ध्वस्त करने के संबंध में बुधवार को दिशानिर्देश भी जारी किए और कहा कि अधिकारी जज नहीं हो सकते, वे आरोपी को दोषी करार नहीं दे सकते और उसका घर नहीं गिरा सकते।

जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि लोगों के घर सिर्फ इसलिए ध्वस्त कर दिए जाएं कि वे आरोपी या दोषी हैं, तो यह पूरी तरह असंवैधानिक होगा। न्यायमूर्ति गवई ने फैसला सुनाते हुए कहा कि महिलाएं और बच्चे रातभर सकड़ों पर रहें, यह अच्छी बात नहीं है।

ऐसे में आपके लिए ये जानना बेहद ही जरूरी हो जाता है कि अगर आपके पास भी नगर निगम या दूसरी किसी सिविक बॉडी से घर को तोड़ना का नोटिस मिला है, तो सुप्रीम कोर्ट की ये नई गाइडलाइंस आपके कितने काम की हो सकती है।


सुप्रीम कोर्ट ने ध्वस्तिकरण के लिए गाइडलाइन तय की हैं, जो कहती हैं:

  • - कारण बताओ नोटिस के बिना कोई तोड़फोड़ नहीं होगी।
  • - कारण बताओ नोटिस में कम से कम 15 दिन का समय दिया जाना चाहिए और इसके खिलाफ अपील भी की जा सकती है।
  • - कारण बताओ नोटिस की कोई बैकडेटिंग न हो यह सुनिश्चित करने के लिए नोटिस की जानकारी जिला मजिस्ट्रेट को भी भेजी जाएगी।
  • - नोटिस में ये बताना होगा कि अवैध निर्माण किस तरह का है, उससे क्या उल्लंघन हो रहा है और किस आधार पर ध्वस्तिकरण किया जाएगा।
  • - व्यक्तिगत सुनवाई की अनुमति दी जाएगी और मिनट्स भी दर्ज किए जाएंगे।
  • - प्राधिकरण बताएगा कि ध्वस्त करना ही एकमात्र रास्ता क्यों है।
  • - अवैध निर्माण हटाने का मौका दिया जाए।
  • - तोड़फोड़ की वीडियोग्राफी कराई जाए।

बेंच ने यह भी साफ किया कि अगर सार्वजनिक भूमि पर अनधिकृत निर्माण हो या अदालत की ओर से ध्वस्त करने का आदेश दिया गया हो, तो वहां उसके निर्देश लागू नहीं होंगे।

इसने कहा कि संविधान और आपराधिक कानून के आलोक में आरोपी और दोषियों को कुछ अधिकार और सुरक्षा उपाय हासिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने देश में संपत्तियों को ढहाने के लिए दिशा-निर्देश तय करने के अनुरोध वाली याचिकाओं पर यह व्यवस्था दी।

'सिर्फ आरोपी होने पर किसी का घर नहीं गिरा सकते': बुलडोजर एक्शन पर SC सख्त, कहा- कार्यपालिका जज नहीं बन सकती

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।