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हाईकोर्ट ने यूपी के सरकारी टीचर्स को दी बड़ी राहत, अब इस काम से मिलेगा छुटकारा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि शिक्षकों की मुख्य जिम्मेदारी पढ़ाना है, इसलिए उन्हें बिना जरूरत के चुनावी कार्यों में नहीं लगाया जाना चाहिए। बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) बनाना अंतिम विकल्प होना चाहिए। हाईकोर्ट ने यह आदेश झांसी के एक शिक्षक सूर्य प्रताप सिंह की याचिका पर दिया

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 14, 2025 पर 10:12 AM
हाईकोर्ट ने यूपी के सरकारी टीचर्स को दी बड़ी राहत, अब इस काम से मिलेगा छुटकारा
न्यायमूर्ति अजय भनोट ने कहा कि चुनावी ड्यूटी में शिक्षकों की तैनाती कम से कम होनी चाहिए

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव ड्यूटी को लेकर अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों का मुख्य काम पढ़ाना है, इसलिए उन्हें चुनावी कामों में अंतिम विकल्प के रूप में ही लगाया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि शिक्षकों को बिना सोचे-समझे चुनाव ड्यूटी पर न भेजा जाए और बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) बनाने का फैसला भी जरूरत पड़ने पर ही लिया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने शिक्षक सूर्य प्रताप सिंह की याचिका पर दिया।

शिक्षकों की तैनाती कम से कम हो

न्यायमूर्ति अजय भनोट ने कहा कि चुनावी ड्यूटी में शिक्षकों की तैनाती कम से कम होनी चाहिए और चुनाव आयोग के नियमों का सख्ती से पालन किया जाए।झांसी जिले में प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्‍यापक सूर्य प्रताप सिंह ने याचिका दाखिल कर बूथ लेवल अधिकारी के रूप में अपनी नियुक्ति को चुनौती दी थी। सूर्य प्रताप सिंह का कहना था कि उनका चुनाव में कार्य मतदाता सूची में संशोधन करना शामिल था। यह लगातार चलने वाला काम है। याची के अधिवक्‍ता एमसी त्रिपाठी का कहना था कि शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी लगाना गलत है।

शिक्षक का काम पढ़ाना है

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