Bajaj Finance Manager Suicide: उत्तर प्रदेश के झांसी में कथित रूप से फाइनेंस कंपनी Bajaj Finance में काम करने वाले 42 वर्षीय एक एरिया मैनेजर ने आत्महत्या कर ली। पुलिस का कहना है कि उस व्यक्ति पर पिछले तीन महीने से टारगेट पूरा करने का दबाव था। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के सीनियर अधिकारी टारगेट पूरा नहीं होने पर उसे नौकरी से निकालने की धमकी दे रहे थे। इसलिए मैनेजर दिन-रात तनाव में रहकर नौकरी कर रहे थे। तरुण सक्सेना ने सुसाइड नोट में खुलासा किया है कि वह अपने काम के दबाव के कारण काफी तनाव में थे। टारगेट पूरा नहीं होने की वजह से 45 दिनों तक बिना सोए वह काम कर रहा था।
बजाज फाइनेंस में करीब आठ साल तक काम करने वाले तरुण सक्सेना (Tarun Saxena) ने अपनी पत्नी के नाम एक सुसाइड नोट छोड़ा है। इस नोट में सक्सेना ने खुलासा किया है कि वह अपने बॉस के दबाव के कारण काफी तनाव में थे। कथित तौर पर बॉस उस पर दबाव बना रहे थे कि या तो वह अपने टारगेट को पूरा करे या फिर नौकरी छोड़ दे। अभी तक परिवार ने FIR दर्ज नहीं कराई है। बजाज फाइनेंस ने भी अभी तक आरोपों का जवाब नहीं दिया है।
सक्सेना के परिवार में उनके माता-पिता, पत्नी मेघा और दो बच्चे यथार्थ और पीहू हैं। उनको घर के नौकर ने फांसी पर लटका हुआ पाया। आत्महत्या करने से पहले उन्होंने अपनी पत्नी और दो बच्चों को एक अलग कमरे में बंद कर दिया था। न्यूज 18 के मुताबिक, घर के नौकर ने तुरंत सक्सेना के चचेरे भाई गौरव सक्सेना को घटना की जानकारी दी। गौरव पास में ही रहता है। वह खबर मिलते ही तरुण के घर पहुंचा। उसने जब उस कमरे का दरवाजा खोला, तो देखा कि उसने आत्महत्या कर ली थी। बाद में पुलिस को भी इस दुखद घटना की सूचना दी गई।
इंडिया टुडे ने गौरव के हवाले से बताया, "तरुण सक्सेना मेरे बड़े चचेरे भाई थे। वह बजाज फाइनेंस में एरिया मैनेजर के पद पर काम करते थे। कंपनी उन पर बाजार से अधिक कलेक्शन लाने का दबाव बना रही थी। जब वह टारगेट पूरा करने में विफल रहे, तो उनकी सैलरी काट ली गई। जैसा कि हमें आज सुबह करीब 6:00 बजे पता चला, भोपाल में रहने वाले वैभव सक्सेना और प्रभाकर मिश्रा ने उनके साथ एक कॉन्फ्रेंस की और उन्हें उकसाया, जिसके बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली।"
NDTV के अनुसार, सक्सेना ने अपने सुसाइड नोट में उल्लेख किया है कि उन्हें और उनके सहकर्मियों को उन EMI का भुगतान करना पड़ा जो वे अपने क्षेत्र से वसूल नहीं कर पाए। रिपोर्ट के अनुसार, सक्सेना ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है, "मैं भविष्य को लेकर बहुत तनाव में हूं। मैंने सोचने की क्षमता खो दी है। मैं जा रहा हूं... मैं 45 दिनों से सोया नहीं हूं। मैंने मुश्किल से कुछ खाया है। मैं बहुत तनाव में हूं। सीनियर मैनेजर मुझ पर किसी भी कीमत पर लक्ष्य पूरा करने या नौकरी छोड़ने का दबाव बना रहे हैं।"
नहीं भर पा रहे थे स्कूल फीस
दो बच्चों के पिता तरुण ने यह दुखद कदम उठाने से पहले पूरे साल उनकी स्कूल फीस का भुगतान किया था। सुसाइड नोट में लिखा है, "आप सभी मेघा, यथार्थ और पीहू का ख्याल रखना। मम्मी, पापा, मैंने कभी कुछ नहीं मांगा, लेकिन अब मांग रहा हूं। कृपया दूसरी मंजिल बनवा दें ताकि मेरा परिवार आराम से रह सके।"
आउटलेट ने आगे बताया कि सक्सेना ने अपने पांच पन्नों के नोट में अपने बच्चों से कड़ी मेहनत से पढ़ाई करने और अपनी मां की देखभाल करने का आग्रह किया। उन्होंने अपने रिश्तेदारों को भी निर्देश दिया कि वे उनके परिवार को बीमा राशि प्राप्त करने में मदद करें।
पुलिस को दिए गए नोट में सक्सेना ने अपने सीनियर्स का नाम लेते हुए कहा, "मेरे फैसले के लिए वे ही जिम्मेदार हैं।" उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि उनका परिवार उन लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराए जिनका उन्होंने उल्लेख किया था।
झांसी के SP ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि तरुण ने दुपट्टे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इंडिया टुडे ने कुमार के हवाले से बताया, "एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें मृतक ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है, जो उस पर अधिक वसूली का दबाव बनाते थे। अगर परिवार द्वारा शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो आगे की जांच शुरू की जाएगी।"