Bihar Green Rice: देश में किसानों के आर्थिक हालात किसी से छिपे नहीं है। किसान कई तरह की वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। इस बीच एक ऐसे भी किसान हैं। जिनके एक प्रयोग से पूरे देश में चर्चा हो रही है। बिहार के चंपारण जिले के छपरा पंचायत के सागर चुरामन गांव के रहने वाले किसान प्रयागदेव सिंह इन दिनों सुर्खियों में हैं। हर किस्म की फसल उगाने के तौर पर उनको पहचाना जाता है। ऐसे ही प्रयागदेव ने हरे धान की खेती शुरू कर दी। किसान प्रयागदेव कई तरह की धान की फसलें उगा रहे हैं। इसमें काला चावल, हरा चावल, मैजिक राइस, जैसी तमाम किस्में शामिल हैं।
हरा चावल की खुशबू बासमती चावल की तरह है। सिंह ने बताया कि मिनरल्स और विटामिन से भरपूर इन चावलों का इस्तेमाल कई रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए फायदेमंद साबित होता है। किसान सिंह ने काले,हरे,लाल और मैजिक चावल के साथ-साथ अंबे चावल का भी खेती करते हैं। इनकी खेती पूरी तरह से जैविक तरीके से की जाती है।
500 रुपये किलो बिकता है हरा चावल
किसान प्रयागदेव सिंह के मुताबिक, हरा चावल सिर्फ एक चावल नहीं है, बल्कि यह किसी औषधि से कम नहीं है। यह शुगर के मरीजों के बहुत फायदेमंद है। उन्होंने कहा कि यह चावल आमतौर पर 500 रुपये किलो बिकता है। हरे चावल में कई तरह के विटामिंस पाए जाते हैं। इसकी फसल 170 दिन में तैयार हो जाती है। वहीं हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि हरे चावल से कई बड़ी बीमारियों में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह कैंसर जैसे मरीजों के लिए भी फायदेमंद होता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए यह किसी रामबाण से कम नहीं है।
काला, लाल मैजिक राइस की खेती
किसान प्रयागदेव कई तरह के चावल उगाते हैं। काले चावल के बारे में बात करते हुए सिंह ने कहा कि काला चावल दो तरह का होता है। एक 160 दिनों में पक कर तैयार हो जाता है। वही दूसरा 110 दिनों में तैयार होता है। इनके दानों में अंतर देखा जा सकता है। इसमें भरपूर मात्रा में मिनिरल्स पाए जाते हैं। यह चावल डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद माना जाता है। वही लाल चावल हार्ट, कैंसर और शुगर आदि रोगों से पीड़ित लोगों के लिए फायदेमंद होता है। यह 110 दिनों में तैयार हो जाता है।