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Bihar Jitiya Tragedy: बिहार में बड़ा हादसा! नदी में डूबने से 37 बच्चों समेत 43 लोगों की मौत, 3 लापता

Tragedy in Bihar: बिहार में जीवित्पुत्रिका त्योहार पर स्नान के दौरान डूबने से 43 लोगों की मौत हो गई और तीन लापता हो गए हैं। बुधवार (25 सितंबर) को आयोजित उत्सव के दौरान राज्य के 15 जिलों में ये घटनाएं हुईं। जीवित्पुत्रिका उत्सव के दौरान महिलाएं अपने बच्चों की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं और दोनों पवित्र स्नान करते हैं

Akhileshअपडेटेड Sep 26, 2024 पर 7:29 PM
Bihar Jitiya Tragedy: बिहार में बड़ा हादसा! नदी में डूबने से 37 बच्चों समेत 43 लोगों की मौत, 3 लापता
Tragedy in Bihar: जीवित्पुत्रिका त्योहार के दौरान महिलाएं अपने बच्चों की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं

Jivitputrika Tragedy in Bihar: बिहार से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। राज्य के अलग-अलग जिलों में जीवित्पुत्रिका (Jivitputrika) व्रत त्योहार के दौरान अलग-अलग घटनाओं में नदियों और तालाबों में पवित्र स्नान करते समय 37 बच्चों समेत 43 लोगों की डूबने से मौत हो गई। वहीं इस हादसे में तीन अन्य लापता हो गए हैं। राज्य सरकार ने गुरुवार (26 सितंबर) को एक बयान में यह जानकारी देते हुए बताया कि ये घटनाएं बुधवार (25 सितंबर) को त्योहार के दौरान राज्य के 15 जिलों में हुईं। इसे जितिया त्योहार भी कहा जाता है। इस त्योहार के दौरान महिलाएं अपने बच्चों की कुशलता के लिए व्रत रखती हैं और दोनों साथ में पवित्र स्नान करते हैं।

आपदा प्रबंधन विभाग (DMD) की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, "अब तक कुल 43 शव बरामद किए गए हैं। आगे की तलाशी अभियान जारी है।" न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।

बयान में कहा गया कि अनुग्रह राशि प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आठ मृतकों के परिजनों को यह राशि मिल चुकी है। बयान में कहा गया है कि पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, नालंदा, औरंगाबाद, कैमूर, बक्सर, सीवान, रोहतास, सारण, पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, गोपालगंज और अरवल जिलों से डूबने की घटनाएं सामने आईं।

जीवित्पुत्रिका व्रत आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला एक वार्षिक व्रत है। इस साल यानी 2024 में यह व्रत 25 सितंबर को मनाया गया। यह परंपरा विशेष रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में काफी लोकप्रिय है। यह व्रत माताएं अपने बच्चों की सुरक्षा और लंबी आयु के लिए रखती हैं। इस त्योहार को अत्यधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसमें भाग लेने वाले पूरे दिन और रात में भोजन या पानी का सेवन नहीं करते हैं।

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