Kerala High Court: केरल हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि किसी महिला के बॉडी स्ट्रक्चर (शारीरिक संरचना) पर कमेंट करना सेक्शुअल हैरेसमेंट यानी यौन उत्पीड़न के बराबर है। हाई कोर्ट ने कहा कि किसी महिला की बॉडी स्ट्रक्चर पर टिप्पणी यौन दृष्टि से प्रेरित कमेंट है, जो सेक्शुअल हैरेसमेंट के तहत दंडनीय अपराध की कैटेगरी में आएगी। जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने इस संबंध में केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEB) के एक पूर्व कर्मचारी की याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिका में आरोपी ने उसी संगठन की एक महिला कर्मचारी द्वारा उसके खिलाफ दायर यौन उत्पीड़न के मामले को रद्द करने का अनुरोध किया था।
'लाइव एंड लॉ' के मुताबिक, अदालत ने सोमवार (6 जनवरी) को अपने अहम फैसले में कहा कि एक व्यक्ति द्वारा एक महिला के शरीर की संरचना के बारे में टिप्पणी करना और उसे "फाइन (Fine)" कहना प्रथम दृष्टया यौन रूप से प्रेरित टिप्पणी है। महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपी 2013 से उसके खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहा था। फिर 2016-17 में उसने आपत्तिजनक संदेश और वॉयस कॉल भेजना शुरू कर दिया।
उसने दावा किया था कि KSEB और पुलिस में शिकायत के बावजूद वह उसे आपत्तिजनक मैसेज भेजता रहा। जब शिकायतकर्ता केरल राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड के इलेक्ट्रिकल सेक्शन में काम कर रही थी, तब आरोपी ने यौन रूप से भड़काऊ टिप्पणी की थी। उसने कहा था कि महिला की "बॉडी स्ट्रक्चर ठीक है (body structure was fine)"। यह भी आरोप लगाया गया कि आरोपी ने उसके मोबाइल नंबर पर यौन रूप से भड़काऊ मैसेज भेजे।
महिला की शिकायतों के बाद, आरोपी पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 ए (यौन उत्पीड़न) और 509 (महिला की गरिमा को अपमानित करने) और केरल पुलिस अधिनियम की धारा 120 (ओ) (अवांछित कॉल, पत्र, लिखित, संदेश भेजने के लिए संचार के किसी भी माध्यम का इस्तेमाल कर परेशान करना) के तहत मामला दर्ज किया गया।
मामले को रद्द करने का अनुरोध करते हुए अभियुक्त ने दावा किया कि किसी को उसकी सुंदर शारीरिक काया के लिए टिप्पणी करना, आईपीसी की धारा 354A और 509 तथा केरल पुलिस अधिनियम की धारा 120 (o) के तहत यौन रंजित टिप्पणी की कैटेगरी में नहीं माना जा सकता। वहीं, अभियोजन पक्ष और महिला ने दलील दी कि आरोपी के फोन कॉल और संदेशों में अभद्र टिप्पणियां थीं। उसका उद्देश्य पीड़ित को परेशान करना और उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाना था।
पीटीआई के मुताबिक, अभियोजन पक्ष की दलीलों से सहमति जताते हुए केरल हाई कोर्ट ने 6 जनवरी के अपने आदेश में कहा कि प्रथमदृष्टया भारतीय दंड संहिता की धारा 354A और 509 तथा केरल पुलिस अधिनियम की धारा 120 (0) के तहत अपराध के लिए उपयुक्त तत्व दिखाई देते हैं।
धारा 354A पर चर्चा करते हुए अदालत ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कोई भी पुरुष जो किसी महिला पर यौन रूप से भड़काऊ टिप्पणी करता है, वह यौन उत्पीड़न के अपराध का दोषी है। इसी के साथ अदालत ने याचिकाकर्ता की दलील को खारिज कर दिया।