Cotton Candy Ban: हरी, पीली, लाल, नीली कॉटन कैंडी (Cotton Candy) जिसे कोई बुड्ढी के बाल तो कोई दादी के बाल तो कोई गुड़िया के बाल के नाम से भी जानता है। रुई जैसी दिखने वाली ये कैंडी मीठी होती है। खाने के बाद जीभ पर अपना रंग छोड़कर जाने वाली ये कॉटन कैंडी छोटे-मोटे स्नैक (Sweet Snacks) के तौर पर काफी पसंद की जाती है। 90s के बच्चों का तो ये फेवरेट स्नैक हुआ करती थी। आज भी सैर-सपाटे पर निकले कपल्स और फैमिलीज इसका सेवन करना पसंद करती हैं। खैर अब लोगों का ये फेवरेट कैंडी (Favourite Candy) बैन होने वाला है। तमिलनाडु ने तो इसे पहले से ही बैन कर दिया है अब बारी दिल्ली की है। जानिए क्या है पूरा विवाद-
तमिलनाडु में कॉटन कैंडी की क्वालिटी खराब
तमिलनाडु में बैन के बाद अब दिल्ली में भी इसकी क्वॉलिटी पर जांच की योजना बनाई जा रही है। अभी तक की जांच में केवल ब्लू और पिंक कलर वाली कॉटन कैंडी में ही केमिकल मिला है, जबकि जिस कॉटन कैंडी में कलर मिक्स नहीं किया गया था, उसमें कोई केमिकल नहीं मिला है।
Cotton Candy में जानलेवा केमिकल
ऐसे में नॉर्मल कॉटन कैंडी का आनंद बच्चे उठा सकते हैं। वहीं एक्सपर्ट की मानें तो कॉटन कैंडी को कलरफुल बनाने के लिए उन में रंग बदलने के लिए केमिकल का इस्तेमाल होता है। केमिकल का फूड प्रोडक्ट में इस्तेमाल होना काफी चिंता की बात है। अगर एक राज्य में कॉटन कैंडी में केमिकल मिला है तो पूरी संभावना है कि बाकी राज्यों में भी ऐसा ही हो सकता है।
Cotton Candy से हो सकता है लिवर कैंसर
दिल्ली सरकार ने इस पर जांच कराने का फैसला किया है। इसके लॉन्ग टर्म इस्तेमाल से कैंसर हो सकता है, जिसमें लिवर कैंसर प्रमुख है। दिल्ली एनसीआर में रोडामाइन बी का इस्तेमाल स्ट्रीट फूड्स में भी हो रहा है, इसलिए पॉलिसी मेकर को ध्यान देना होगा। गैर जिम्मेदराना तरीके से इस केमिकल का इस्तेमाल मास मर्डर से कम नहीं है, इसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाने ही चाहिए।