दूध में डिटर्जेंट, कैंडी में डिशवॉश लिक्विड, भारत में खाने की चीजों में मिलावट की डरावनी कहानियां, सोशल मीडिया पर हो रहीं वायरल

2012 में पब्लिस हुई CSE रिपोर्ट ने इस दावे का समर्थन किया कि वास्तव में दूध में डिटर्जेंट मिलाया जा रहा था। ये मिलावट खतरनाक हैं और अंगों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने अपनी पिछली रिपोर्ट में कहा था कि दूध में डिटर्जेंट के कारण फूड पॉइजनिंग और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल परेशानी होती

अपडेटेड Jun 21, 2024 पर 8:36 PM
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दूध में डिटर्जेंट, कैंडी में डिशवॉश लिक्विड, भारत में खाने की चीजों में मिलावट की डरावनी कहानियां

दूध को सफेद और झागदार बनाने के लिए डिटर्जेंट का इस्तेमाल कैसे किया जाता है, इस पर एक X यूजर की पोस्ट ने इस मिलावट को गोरख धंधे का पूरा खेल सोशल मीडिया पर सामने ला दिया है और कई दूसरे यूजर्स ने भी मिलावटी खाने के अपने-अपने अनुभव भी शेयर किए। ये सब तब शुरू हुआ, जब एक आंत्रप्रेन्योर राम (@ramprasad_c), जो लिक्विड डिटर्जेंट का बनाने थे, उन्होंने याद किया कि 2005 में उनके एक सेल्स एग्जीक्यूटिव ने उन्हें क्या बताया था।

राम ने लिखा, "भारत में फूड सेफ्टी पर, यहां एक कहानी है, जिसने मुझे चौंका दिया। कई साल पहले, मैंने एक बड़ी कंपनी में काम करते हुए एक नया लिक्विड डिटर्जेंट लॉन्च किया था। बिक्री करने वालों में से एक मेरे पास आया और कहा कि अगर खुशबू इतनी तेज न होती, तो वो और भी ज्यादा बेचता।"


उन्होंने आगे लिखा, "मैंने पूछा कि क्या उसे खुशबू को लेकर किसी उपभोक्ता से कोई प्रतिक्रिया मिली है। हालांकि, असली कारण वो नहीं था। उसने कहा कि बहुत से लोगों ने दूध में मिलाने के लिए ये लिक्विड डिटर्जेंट खरीदा।"

राम ने आगे बताया, "ऑप्टिकल ब्राइटनर ने लुक को सफेद बना दिया और डिटर्जेंट ने दूध में ज्यादा झाग ला दिया। दूसरी कंपनी वाले के पास हल्की खुशबू वाला प्रोडक्ट था और इन लोगों ने उसे ज्यादा पसंद किया। मैंने उस व्यक्ति से कहा कि हम प्रोडक्ट नहीं बदल रहे हैं। उसके बाद मैंने उन बाजारों से लस्सी और दही खाना बंद कर दिया।"

कैंडी में डिशवॉश लिक्विड की मिलावट

पोस्ट को लगभग पांच लाख व्यूज और 4,500 लाइक्स मिले। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, एक और X यूजर ने एक दोस्त की मूंगफली कैंडी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से जुड़ी इसी तरह की एक घटना शेयर की।

रॉकी भाई नाम के एक यूजर ने कहा, "मेरा एक दोस्त मूंगफली कैंडी फैक्ट्री चला रहा था और कुक, जो टेम्परेरी काम पर आता था, वो ज्यादा मूंगफली कैंडी बनाता था, जो कि काफी ज्यादा करारी होती थीं... पूछताछ करने पर, मेरे दोस्त को पता चला कि ये नया कुक पकाने से पहले कैंडी के कच्चे मिक्सचर में डिशवॉश लिक्विड मिला रहा था और इससे वे ज्यादा कुरकुरे हो गए और प्रोडक्शन की मात्रा भी ज्यादा हो गई।"

यूजर ने कहा कि उसके दोस्त ने तुरंत कुक को बर्खास्त कर दिया और कैंडी का पूरा स्टॉक फेंक दिया। आखिरकार फैक्टरी बंद कर दी गई।

दूध में मौजूद डिटर्जेंट से होता है फूड प्वाइजनिंग: विशेषज्ञ

2012 में पब्लिस हुई CSE रिपोर्ट ने इस दावे का समर्थन किया कि वास्तव में दूध में डिटर्जेंट मिलाया जा रहा था। ये मिलावट खतरनाक हैं और अंगों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने अपनी पिछली रिपोर्ट में कहा था कि दूध में डिटर्जेंट के कारण फूड पॉइजनिंग और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल परेशानी होती हैं।

2016 में, तत्कालीन केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री हर्ष वर्धन ने लोकसभा को बताया था कि तीन में से दो भारतीय डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा, यूरिया और पेंट मिला हुआ दूध पीते हैं। उन्होंने बेईमान व्यापारियों की तरफ से खाने की चीजों में मिलावट के खिलाफ देश के संघर्ष को रखा।

मसालों की क्वालिटी पर उठे सवाल

हाल ही में, लोकप्रिय मसाला ब्रांडों MDH और Everest को क्वालिटी से जुड़ी चिंताओं के कारण सिंगापुर और हांगकांग में बैन कर दिया गया था।

14 जून को एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के फूड सेफ्टी रेगुलेटर ने मसाला बनाने वाली MDH और एवरेस्ट के प्रोडक्ट की आगे की जांच शुरू कर दी है, क्योंकि लोकप्रिय ब्रांड की समीक्षा तेज हो गई है।

CNBC-TV18 ने एक रिपोर्ट में कहा कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया भी "हानिकारक मसालों" के लिए भारतीय कंपनियों को दंडित कर सकता है।

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