Diabetes: देश में डायबिटीज के मरीजों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। आमतौर पर डायबिटीज के मरीजों को खाने पीने के लिए कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्हें समझ में नहीं आता है कि आखिर क्या खाएं पिएं। इस बीच बीच पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (Punjab Agriculture University) ने गेहूं की एक नई किस्म इजाद की है। इस गेहूं को तैयार करने में वैज्ञानिकों को 10 साल लग गए। कहा जा रहा है कि इस गेहूं का आटा डायबिटीज के मरीजों के लिए दवा की तरह काम करेगा। इसके साथ ही मोटापा और दिल के मरीजों के लिए भी फायदेमंद माना गया है।
बता दें कि देश में 13 लाख से ज्यादा डायबिटीज के मरीज है। ऐसे में इन मरीजों के लिए गेहूं की यह किस्म रामबाण दवाई साबित हो सकती है। इस गेहूं से बनी रोटी खाने से शरीर में ग्लूकोज लेवल में तेजी से इजाफा नहीं होगा।
टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए रामबाण है नए किस्म का गेहूं
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गेहूं की जिस नई किस्म को विकसित किया है। उसका नाम PW RS 1 है। इसका सेवन करने से ब्लड सर्कुलेशन के दौरान शरीर में ग्लूकोज धीरे- धीरे बनेगा। ऐसे में शुगर को कंट्रोल किया जा सकेगा। इस गेहूं की सबसे बड़ी खासियत है कि कम खाने पर ही पेट भर जाएगा। बहुत देर तक भूख नहीं लगेगी। जो लोग 6 रोटियां खाते हैं उनका सिर्फ 3 रोटी में पेट भर जाएगा। इस तरह कम रोटी खाने से शुगर के साथ- साथ वजन को भी कंट्रोल करने में मदद मिलेगी। जिससे शरीर पूरी तरह से स्वस्थ्य रहेगा। इस गेहूं से बनी रोटी और बिस्कुट का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बेहद कम होगा। जिससे ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी।
गेहूं की इस नई किस्म PW RS 1 में कुल स्टार्च की मात्रा गेहूं की अन्य किस्मों के मुकाबले 66-70 फीसदी के बराबर होती है। लेकिन इसमें 30.3 फीसदी प्रतिरोधी स्टार्च (Resistant Starch) कंटेंट है। वहीं अन्य किस्मों में 56-62 फीसदी गैर-प्रतिरोधी स्टार्च कंटेंट है जो PBW RS1 में लगभग आधी (37.1 फीसदी) है।