तमिलनाडु पुलिस ने हाल ही में एक ED ऑफिसर को घूस के मामले में गिरफ्तार किया है। तमिलनाडु के डिंडीगुल में इस ED ऑफिसर को सरकारी अफसर से 20 लाख रुपए की घूस लेना महंगा पड़ा। राज्य के एंटी करप्शन विभाग ने अंकित तिवारी को गिरफ्तार किया है और 15 दिसंबर के लिए न्यायिक हिरास्त में भेजा है। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक कि इस केस में हुई जांच से पता चला है कि मदुरई और चेन्नई के और भी ऑफिसर्स इस केस में इनवॉल्व हैं।
अरेस्ट हुए ऑफिसर अंकित तिवारी लगातार कई लोगों को ब्लैकमेल कर रहे हैं और उनसे करोड़ों की रिश्वत भी ली है। सिर्फ इतना ही नहीं ये पैसा दूसरे ईडी ऑफिसर्स में भी बांटा गया है। डायरेक्टोरेट ऑफ विजिलेंस और एंटी करप्शन ने बताया कि तिवारी लीगल एक्शन से बचाने के नाम पर एक सरकारी कर्मचारी से तीन करोड़ रुपए लिए थे।
लीगल एक्शन से बचने के लिए पैसे की मांग
अक्टूबर में अंकित ने डिंडीगुल के एक सरकारी कर्मचारी से संपर्क किया था। उस अधिकारी को बताया कि उनके खिलाफ एक केस रजिस्टर हो चुका है । तिवारी ने एंप्लॉयी को बताया कि PMO की ओर से उसके खिलाफ इनक्वायरी कंडक्ट करने का निर्देश भी मिल गया है। अक्टूबर 30 को उस कर्मचारी को मदुरई स्थित ईडी ऑफिस में आने के लिए भी कहा। जब आदमी मदुरई पहुंचा तो अंकित ने लीगल एक्शन से बचने के लिए उसे तीन करोड़ रुपए देने के लिए कहा।
व्हाट्स ऐप पर होती थी बातचीत
अंकित ने इसके बाद कर्मचारी को भरोसा दिलाया कि उसने अपने से उच्च अधिकारियों से बात कर ली है और 51 लाख की घूस के लिए मान गए। 1 नवंबर को कर्मचारी ने 20 लाख रुपए की पहली इंस्टॉलमेंट दी। इसके बाद तिवारी ने कई मौकों पर व्हाट्स ऐप कॉल और टेक्स्ट मैसेजेस के जरिए डराना-धमकाना शुरू कर दिया। जल्द से जल्द 51 लाख रुपए देने के लिए कहा गया। सरकारी कर्मचारी को तिवारी पर शक हुआ और उसने डिंडीगुल जिले के विजिलेंस और एंटी करप्शन यूनिट में शिकायत दर्ज करवा दी। DVAC ने अंकित तिवारी को 20 लाख की घूस लेने के बाद गिरफ्तार किया। अंकित तिवारी 2016 बैच के ऑफिसर हैं और अभी तक गुजरात और मध्य प्रदेश में काम कर चुके हैं।