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Farmers Protest: किसान आंदोलन पर लगा एक हफ्ते का ब्रेक, जानिए आखिर क्यों सड़क पर उतरे किसान

Noida Farmers protest: दिल्ली की संसद का घेराव करने वाले किसानों ने अपने आंदोलन को एक हफ्ते के लिए टाल दिया है। हालांकि, एक हफ्ते तक किसान दलित प्रेरणा स्थल पर ही रुकेंगे। इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो किसान दिल्ली कूच करेंगे। किसानों के फैसले के बाद दलित प्रेरणा स्थल को यातायात के लिए खोल दिया गया है। आइये जानते हैं आखिर नोएडा के किसान क्यों सड़क पर उतरे

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 03, 2024 पर 8:51 AM
Farmers Protest: किसान आंदोलन पर लगा एक हफ्ते का ब्रेक, जानिए आखिर क्यों सड़क पर उतरे किसान
Noida Farmers protest: किसानों ने अपने प्रदर्शन को रोक दिया है। सरकार के साथ बैठक के बाद अगली रणनीति तय की जाएगी।

उत्तर प्रदेश के किसान अब एक हफ्ते तक दिल्ली कूच नहीं करेंगे। यह फैसला किसान नेताओं की ग्रेटर नोएडा, नोएडा और यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया है। इसके बाद नोएडा एक्सप्रेस-वे से बैरिकेडिंग हटा दी गई और आवाजाही शुरू हो गई है। किसानों ने अपनी मांगों पर फैसला लेने के लिए केंद्र सरकार को एक हफ्ते का समय दिया है। इस दौरान किसान दलित प्रेरणा स्थल पर आंदोलन करेंगे। ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर क्या कारण रहे, जिसकी वजह से किसान सड़कों पर उतर आए और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।

किसान संगठन का कहना है कि आंदोलन को फिलहाल स्थगित किया गया है। यूपी सरकार के साथ बातचीत की जाएगी। अगर बातचीत सफल नहीं हुई तो फिर से दिल्ली कूच पर निर्णय लिया जाएगा। किसान प्रतिनिधि अब राज्य सरकार से बातचीत करेंगे। इस बीच पुलिस प्रशासन ने दलित प्रेरणा स्थल के गेट नंबर-3 के सामने लगाए गए बैरीकेड को हटा दिया है। रास्ते को आम लोगों के लिए खोल दिया गया है।

आखिर सड़क पर क्यों उतरे नोएडा के किसान

दरअसल, नोएडा में किसानों के इस आंदोलन की बड़ी वजह हाई पावर कमेटी की रिपोर्ट से जुड़ी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोएडा के किसानों की मांग को पूरा करने के लिए हाईपावर कमेटी बनाई गई। इस कमेटी की रिपोर्ट से किसान नाखुख रहे। यह रिपोर्ट राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश की अध्यक्षता में बनाई गई। जिसमें मंडलायुक्त, जिलाधिकारी सदस्य थे। रिपोर्ट को बनाने से पहले करीब 5 बार किसानों के साथ बैठक की गई। साथ ही नोएडा ग्रेटर नोएडा और यमुना विकास प्राधिकरण के सीईओ का सहयोग लिया गया। इसमें किसानों की प्रमुख मांगों को दरकिनार कर दिया गया। किसानों की प्रमुख मांग 10 फीसदी विकसित लैंड और 64.7 फीसदी की दर से मुआवजा की है। हाई पावर कमेटी की सार्वजनिक हुई रिपोर्ट में इन दोनों मांग को ही खारिज कर दिया गया था। कमेटी ने दोनों ही मांग पर असहमति जताई थी।

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