Get App

एक डिनर के लिए ₹4141425! जानिए किसके साथ डिनर के लिए चुकानी होगी ये कीमत

विवेक रामास्वामी के माता-पिता 40 साल पहले संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए थे। रामास्वामी ने हार्वर्ड और येल विश्वविद्यालयों में पढ़ाई की है और उनकी संपत्ति 50 करोड़ डॉलर से अधिक होने का अनुमान है। रामास्वामी आखिरी बार अपनी शादी के तुरंत बाद साल 2015 में भारत आए थे। वह लगभग दो सप्ताह तक रुके और केरल के विभिन्न मंदिरों का दौरा किया

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Sep 22, 2023 पर 2:09 PM
एक डिनर के लिए ₹4141425! जानिए किसके साथ डिनर के लिए चुकानी होगी ये कीमत
रामास्वामी आखिरी बार अपनी शादी के तुरंत बाद साल 2015 में भारत आए थे।

अमेरिका की सिलिकॉन वैली स्थिति कंपनियों के कुछ बॉस अगले शुक्रवार यानि 29 सितंबर को विवेक रामास्वामी (Vivek Ramaswamy) के लिए एक फंडरेजर डिनर आयोजित कर रहे हैं। इस डिनर के लिए बेस प्राइस 50000 डॉलर है। भारतीय-अमेरिकी विवेक रामास्वामी अमेरिका के राष्ट्रपति पद के चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार हैं। रामास्वामी के साथ 'इंटीमेट डिनर एंड डिस्कशन' सैन फ्रांसिस्को बे एरिया में इन्वेस्टर और सोशल कैपिटल के सीईओ Chamath Palihapitiya के घर पर आयोजित होगा। Puck के पत्रकार Teddy Schleifer ने इस डिनर का इन्वाइट सोशल मीडिया पर शेयर किया है और उसी से सामने आया है कि डिनर के लिए बेस प्राइस 50,000 डॉलर रखा गया है। भारतीय करेंसी में यह अमाउंट 41.44 लाख रुपये बैठता है।

इन्वाइट के अनुसार, डिनर के अन्य मेजबान वेंचर कैपिटलिस्ट डेविड सैक्स, Altimeter Capital के ब्रैड गेर्स्टनर, दिग्गज क्रिप्टो इन्वेस्टर मैट हुआंग और केटी हॉन हैं। 38 वर्षीय विवेक रामास्वामी की लोकप्रियता राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुनने के लिए अगस्त माह में आयोजित हुई रिपब्लिकन पार्टी की पहली प्राइमरी बहस में उनके प्रदर्शन के बाद से बढ़ रही है। उस बहस में उन्होंने कहा था कि कई लोग उनकी बढ़ती लोकप्रियता से परेशान हैं और उन्हें लगता है कि 38 साल का एक व्यक्ति अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के लिए उम्र के लिहाज से काफी छोटा है। ताजा चुनाव पूर्व सर्वेक्षण दर्शाते हैं कि रामास्वामी अगस्त के अपने प्रदर्शन से 12 अंक ऊपर हैं। वहीं, उनके विरोधियों ने उनकी आलोचना भी तेज कर दी है।

H-1B वीजा कार्यक्रम के मौजूदा सिस्टम के खिलाफ

हाल ही में, रामास्वामी ने लोकप्रिय H-1B वीजा कार्यक्रम की आलोचना करते हुए कहा था कि मौजूदा लॉटरी प्रणाली को खत्म करने की जरूरत है। साथ ही इसे अमेरिका की जरूरतों से मेल खाने के लिए योग्यता वाली स्किल बेस्ड इमीग्रेशन स्कीम से बदल दिया जाना चाहिए। टेक कंपनियां भारत और चीन जैसे देशों से हर साल हजारों कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए इस पर निर्भर हैं। रामास्वामी ने भी 29 बार वीजा कार्यक्रम का इस्तेमाल किया है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें