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Hindu Temple Berlin: 20 सालों तक वित्तीय परेशानियों से जूझता रहा जर्मनी का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर, इस दिवाली खुलेंगे कपाट

Hindiu Temple Berlin: पचास साल पहले कृष्णामूर्ति बर्लिन आए थे। तब से उनका यही सपना था कि वो वहां अपनी कम्युनिटी के लिए एक मंदिर की स्थापना करें। इलेक्ट्रिकल कंपनी AEG में काम करते हुए उन्हें एक एसोसिएशन बनाई जो श्री गणेश मंदिर तैयार करने वाली थी। हालांकि बीच में कई ऐसी परेशानियां आई जिसके बाद मंदिर को पूरी तरह से तैयार करने में ही उन्हें लगभग 20 साल लग गए।

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 04, 2023 पर 12:53 PM
Hindu Temple Berlin: 20 सालों तक वित्तीय परेशानियों से जूझता रहा जर्मनी का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर, इस दिवाली खुलेंगे कपाट
फाइनेंशियल दिक्कतों की वजह से जो काम 2007 में शुरू होने वाला था वो 2010 तक भी शुरू नहीं हो पाया।

Hindu Temple Berlin: जर्मनी का सबसे बड़ा मंदिर बर्लिन में अब तैयार हो चुका है। 70 वर्षीय विल्वनाथन कृष्णामूर्ति के सालों के अथक प्रयासों के बाद 20 सालों में ये मंदिर बनकर तैयार हुआ। 20 साल पहले इस मंदिर की कंस्ट्रक्शन का काम शुरू किया गया था जो अब जाकर पूरा हुआ। भले ही मंदिर बनकर पूरी तरह तैयार हो गया है लेकिन इसके अंदर अभी भी भगवान विराजमान नहीं है। ऐसे में कृष्णामूर्ति नवंबर में छह दिन लंबा सेलिब्रेशन रखने वाले हैं। ऐसे में कहते हैं कि हमें अभी भी भगवान का इंतजार है।

पचास साल पहले बर्लिन आए और अब जाकर बनवा दिया मंदिर

पचास साल पहले कृष्णामूर्ति बर्लिन आए थे। तब से उनका यही सपना था कि वो वहां अपनी कम्युनिटी के लिए एक मंदिर की स्थापना करें। इलेक्ट्रिकल कंपनी AEG में काम करते हुए उन्हें एक एसोसिएशन बनाई जो श्री गणेश मंदिर तैयार करने में जुट गई। आखिरकार इस एक मंदिर को तैयार करने में बीस साल कैसे लग गए? 2004 में मंदिर के लिए एसोसिएशन का निर्माण किया गया। इसके तुरंत बाद ही बर्लिन जिला अथॉरिटी ने कृष्णामूर्ति को Hasenheide Park के कोने में एक प्लॉट दे दिया। फाइनेंशियल दिक्कतों की वजह से जो काम 2007 में शुरू होने वाला था वो 2010 तक भी शुरू नहीं हो पाया। अभी भी वित्तीय परेशानियां कम नहीं हुई है। कुल चार कारणों से अकसर काम रुक जाता है - पहला है अप्रूवल प्रोसिजर, दूसरा डेडलाइन्स, तीसरा फाइनेंशियल प्लान्स और चौथा रेगुलेशंस।

लोगों ने दिल खोलकर किया दान

कृष्णामूर्ति ने बताया कि हमने इस मंदिर का सारा काम अपनी डोनेशंस के दम पर पूरा किया। बर्लिन सीनेट की ओर से हमें किसी भी तरह का सपोर्ट नहीं मिला। धीरे-धीरे वक्त के साथ बर्लिन में इंडियन टेक प्रोफेशनल्स की संख्या बढ़ती गई। इसी के साथ ही डोनेशंस में भी इजाफा हुआ। हाल ही में बर्लिन में अमेजॉन के लिए सबसे बड़ी बिल्डिंग तैयार की जा रही है। इसी बिल्डिंग से ज्यादातर भारतीयों की इनकम होती है। आगे कृष्णामूर्ति ने बताया कि पिछले पांच सालों में लोग काफी खुले दिल से दान कर रहे हैं।

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