Gyanvapi Mosque Case: वाराणसी कोर्ट के निर्णय के बाद हिंदू पक्ष ने ज्ञानवापी मस्जिद के सीलबंद व्यास जी तहखाने में पूजा-अर्चना शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के आदेश पर 1993 में सील किए जाने के 31 साल बाद तहखाने में फिर से पूजा शुरू कर किया गया है। काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट और याचिकाकर्ता द्वारा एक पुजारी का भी चयन किया गया है, जिन्होंने दावा किया है कि उनके दादा दिसंबर 1993 तक तहखाने में पूजा करते थे। वाराणसी जिला अदालत द्वारा हिंदुओं को ज्ञानवापी परिसर स्थित व्यास जी के तहख़ाने में पूजा का अधिकार दिए जाने के चंद घंटे बाद बुधवार देर रात तहखाने को खोलकर उसकी साफ सफाई की गई और फिर वहां पूजा की गई।
पूजा कार्यक्रम में शामिल हुए व्यास परिवार के सदस्य जितेंद्र नाथ व्यास ने पीटीआई को बताया कि अयोध्या स्थित नवनिर्मित मंदिर में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा का मुहूर्त निकालने वाले गणेश्वर द्रविड़ की अगुआई में बुधवार देर रात काशी विश्वनाथ मंदिर के पुजारी ने व्यास जी के तहखाने में पूजा कराई। इस दौरान जिलाधिकारी एस राजलिंगम, मण्डलायुक्त कौशल राज शर्मा और पुलिस आयुक्त अशोक मुथा जैन तथा मंदिर के कई ट्रस्टी मौजूद थे।
व्यास ने बताया कि काशी विश्वनाथ ट्रस्ट के कर्मचारियों ने सबसे पहले तहखाने के अंदर सफाई और शुद्धिकरण किया और फिर आचार्य गणेश्वर द्रविड़ ने कलश स्थापित किया। उन्होंने बताया कि इसके बाद मंत्रोच्चार कर गौरी-गणेश की आरती की गई। साथ ही सभी देवताओं का स्मरण कर पूजन किया गया, उन्हें नैवैद्य, फल अर्पित किए गए और भोग लगा कर आरती उतारी गई।
व्यास ने बताया कि पूजा-पाठ कार्यक्रम लगभग 40 मिनट चला। काशी विश्वनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रोफेसर नागेंद्र पांडेय ने पीटीआई को बताया कि 31 साल बाद व्यास जी का तहखाना पूजा-पाठ के लिए रात करीब साढ़े 10 बजे खोला गया और उसकी साफ-सफाई कराई गई। पांडेय ने कहा, "जैसा कि अदालत का आदेश था, उसका पालन करना भी जरूरी था तो जिला प्रशासन ने मुस्तैदी के साथ सारी व्यवस्था कर दी है। मुझे लगता है कि जो भी कमी रह गई है उसे धीरे-धीरे दूर कर लिया जाएगा।"
जिला प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक, व्यास जी के तहखाने में जिला अदालत से पूजा-पाठ की अनुमति मिलने के बाद बुधवार की देर रात मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा, जिलाधिकारी एस. राजलिंगम और पुलिस आयुक्त मुथा अशोक जैन ज्ञानवापी परिसर पहुंचे। जिलाधिकारी एस. राजलिंगम ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "मैंने अदालत के आदेश का अनुपालन किया है।"
कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि साफ-सफाई के बाद तहखाने में लक्ष्मी-गणेश की आरती की गई। हिंदू पक्ष के एक वादी सोहनलाल आर्य ने बताया कि गुरुवार तड़के करीब चार बजे वह ज्ञानवापी-श्रंगार गौरी मामले की एक वादी लक्ष्मी देवी के साथ तहखाने में दर्शन-पूजन करने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि अब तहखाने के बैरिकेट्स हटाकर वहां लोहे का गेट लगा दिया गया है। आर्य ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें बताया कि रात में पूजा हो चुकी है, इसलिए वह लोग अब सुबह आएं।
जिला प्रशासन के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इससे पहले रात करीब साढ़े 9 बजे काशी-विश्वनाथ ट्रस्ट के सदस्यों को बुलाकर नंदी महाराज के सामने लगे अवरोधक हटाए गए और रास्ता खोला गया। यह तहखाना ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के अंदर स्थित है।
हाई कोर्ट पहुंचा मुस्लिम पक्ष
हिंदू पक्ष ने दावा किया कि इस तहखाने में वर्ष 1993 तक पूजा-अर्चना होती थी, लेकिन उसी साल तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार ने इसे बंद करा दिया था। मुस्लिम पक्ष ने जिला अदालत के इस निर्णय को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी है। वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद का प्रबंधन करने वाली अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें जिला अदालत के हालिया फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें हिंदुओं को ज्ञानवापी मस्जिद के दक्षिणी तहखाने में प्रार्थना करने की अनुमति दी गई है।