'हजारों जवाबों से अच्छी है मेरी खामोशी...': मनमोहन सिंह के शायराना अंदाज ने बटोरी थी सुर्खियां, देखें वीडियो

Manmohan Singh Poetry: भारत के आर्थिक सुधारों के जनक माने जाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का निधन हो गया है। वह 92 वर्ष के थे। सिंह को उर्दू शेरो-शायरी में गहरी रुचि थी। सुषमा स्वराज के साथ उनकी शायराना नोकझोंक सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा देखी जाने वाली संसदीय बहसों में शुमार की जाती थी

अपडेटेड Dec 27, 2024 पर 4:01 PM
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Manmohan Singh Poetry: मनमोहन सिंह ने कहा था 'हजारों जवाबों से अच्छी है मेरी खामोशी, जो कई सवालों की आबरू ढक लेती है'

Manmohan Singh Poetry: बेहद संयमित और शांत स्वभाव के नेता पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को उर्दू शेरो-शायरी में गहरी रुचि थी। लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की दिवंगत नेता सुषमा स्वराज के साथ उनकी ये शायराना नोकझोंक सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा देखी जाने वाली संसदीय बहसों में शुमार की जाती है। 2011 में संसद में एक तीखी बहस के दौरान लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा ने भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरी प्रधानमंत्री सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार पर निशाना साधने के लिए वाराणसी में जन्मे शायर शहाब जाफरी के शेर का सहारा लिया था।

सुषमा स्वराज ने बहस के दौरान शेर पढ़ते हुए कहा, "तू इधर उधर की न बात कर, ये बता कि काफिला क्यों लुटा... हमें रहजनों से गीला नहीं, तेरी रहबरी का सवाल है।" सिंह ने सुषमा के शेर का तल्खी भरे अंदाज में जवाब देने के बजाय अपने शांत लहजे में बड़ी विनम्रता से अल्लामा इकबाल का शेर पढ़ा जिससे सदन में पैदा सारा तनाव ही खत्म हो गया।

उन्होंने शेर कहा, "माना कि तेरी दीद के काबिल नहीं हूं मैं, तू मेरा शौक देख, मेरा इंतजार कर।" साहित्य में रुचि रखने वाले दोनों नेताओं का 2013 में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के दौरान एक बार फिर आमना सामना हुआ।


सिंह ने सबसे पहले निशाना साधने के लिए मिर्जा गालिब का शेर चुना। उन्होंने कहा, "हम को उनसे वफा की है उम्मीद, जो नहीं जानते वफा क्या है"। स्वराज ने अपनी अनोखी शैली में इसके जवाब में अधिक समकालीन बशीर बद्र का शेर चुना और कहा, "कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, यूं कोई बेवफा नहीं होता।"

जब पत्रकारों ने उनकी सरकार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बारे में सिंह से सवाल पूछे थे तो उन्होंने इसी तरह के शायराना अंदाज में जवाब दिया था। उन्होंने कहा था, "हजारों जवाबों से अच्छी है मेरी खामोशी, जो कई सवालों की आबरू ढक लेती है"।

92 साल की उम्र में ली आखिरी सांसद

भारत के आर्थिक सुधारों के जनक और राजनीति की मुश्किल भरी दुनिया में आम सहमति बनाने वाले डॉ. मनमोहन सिंह का गुरुवार (26 दिसंबर) देर रात दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। वह 92 वर्ष के थे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित कई प्रमुख नेताओं तथा अन्य हस्तियों ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को उनके आवास पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

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तिरंगे में लिपटे पूर्व प्रधानमंत्री के पार्थिव शरीर को उनके आवास पर फूलों से सजे ताबूत में रखा गया, जहां दलगत भावना से ऊपर उठकर नेताओं ने दिवंगत नेता को अंतिम श्रद्धांजलि दी। सिंह की पत्नी गुरशरण कौर और परिवार के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे। सिंह का अंतिम संस्कार शनिवार 28 दिसंबर को किया जाएगा।

कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि सिंह का पार्थिव शरीर शनिवार सुबह पार्टी मुख्यालय में लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद फिर वहीं से शनिवार सुबह साढ़े 9 बजे उनकी अंतिम यात्रा भी शुरू होगी।

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